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रूममेट का लंड अपनी गांड में लिया

जब से मेरे पहले वाले रूम पार्टनर ने नौकरी छोड़ी है, तबसे कुछ रातें मैंने कैसे गुजारी, यह मैं ही जानता हूँ, कहाँ उसने मुझे अपनी औरत बना कर रखा हुआ था। एक ही ऑफिस में थे, उसका रैंक मुझसे बड़ा था, मुझे पहले भेज देता था, घर लौटकर मेरे तो हाव भाव बदल जाते थे, उसके खरीदे कामुक कपड़े, मांग में उसके नाम का सिन्दूर आदि करके मैं उसकी प्रतीक्षा करती थी, पत्नी धर्म अच्छे से निभाती थी। सेक्सी सेक्सी ब्रा-पैंटी, आकर्षक नाईटी आदि खरीदे थे, हर रात सेक्स करते थे वो मुझे हक़ से चोदता था, पर मैं उससे चुद चुद कर बोर भी होने लगा था।

खैर उसके जाने के बाद मैंने कंपनी के गार्ड को रख लिया था, उसको भी मैंने अपने ढंग से खुद पटा लिया था, वो बेचारा भी अपने शहर से दूर था, मेरे साथ रहने से उसका किराया बँट गया था, मेरा कमरा भी बड़ा था। एक दिन मैं जल्दी उठकर नहाया और पैन कैमरा गुप्त जगह रख दिया। बस उसके जाने के बाद मैंने लैपटॉप से जोड़ देखा, क्या लंड था, नौ इंच होगा, सांवले रंग का लंड देख मेरे मुँह से लार टपकने लगी, उसके लंड को देख मुझे पहले वाले के लंड की याद भूल गई, उस रात में खुद दारु लेकर आया, खाना भी मस्त वाला पैक करवाया था।

रात को एक एक पैग लगाया, फ़िर मैंने कहा- थोड़ा फ्रेश होकर बैठते हैं !

अपनी अलमारी खुली छोड़ कर मैं नहाने घुस गया, तौलिया खुद नहीं लेकर गया था।

नहाने के बाद उसको कहा- अलमारी से तौलिया निकाल कर पकड़ाना जरा !

सामने मैंने ब्रा-पैंटी आदि लड़की वाला सामान रख रखा था।

तौलिया पकड़ते समय उसको मैंने अपने लड़की जैसे मम्मे दिखा दिए, मुड़ते मुड़ते गांड भी दिखा दी। मैंने लाल रंग की बेहद सेक्सी पैंटी बरमूडा के नीचे पहन ली।

अब जब उसके पास बैठा तो उसकी आँखों में चमक थी, अजीब सी मुस्कान थी।

दो दो पैग खींचने के बाद वो बोला- आज बहुत गर्मी है !

उसने अपना अंडरवियर बनियान छोड़ सारे कपड़े उतार दिए, बार बार मेरी नजर उसके लंड वाली जगह जाने लगी।

दोनों ने देखते देखते बोतल चढ़ा डाली। वो कपड़े पहन कर ठेके से अद्धा और लेने गया। उसके पीछे से मैंने खुद को ऊपर से नंगा किया।

अब जब आमने सामने बैठे, वो बार बार मेरे चूचे देख रहा था।

बहुत गर्मी कहते हुए मैंने बरमूडा उतार दिया। लड़की वाली पैंटी में देख उसके रहते होश उड़ने लगे।

“खाना खाएँ?” मैं बोला।

“हाँ, चलो रसोई में से लेकर आते हैं !”

“आप बैठो सरताज, मैं हूँ ना !”

मैं खाना लगा कर लाया, नशे में धुत दोनों ने खाया और मैं सिंक पर खड़ा अपने बर्तन साफ़ करने लगा। वो भी अपने बर्तन लाया, पीछे से बर्तन रखने लगा तो उसका लंड मेरी गांड से घिस गया।

मैं दीवानी होने लगी, मैंने गांड पीछे धकेली- लाओ, मैं धो देता हूँ।

बोला- नहीं नहीं !

दोनों चुप थे पर हमारे जिस्म मिल रहे थे। रसोई संभाल दोनों बिस्तर पर लेट गए। कुछ देर टी.वी देखा। स्ट्रीट लाइट की रोशनी काफी कमरे में आती है, मैं धीरे धीरे पीछे सरकती गई, मैंने पैंटी भी उतार दी नशे में !

दोनों को नींद नहीं आ रही थी, कुछ मैं सरकती, कुछ वो सरका, मेरी गांड उसके लंड के बेहद करीब थी। मैं पूरी नंगी थी, मैंने अब गांड को पूरा उसके लंड से लगाया, उसने भी हिम्मत करके मेरी गांड पर हाथ फेरा। मेरी नंगी गांड देख वो मस्त हो गया था।

मैंने चुप्पी तोड़ते हुए कहा- क्या बात है सरताज ! बाँहों में लो न मुझे !

वो बोला- तुम बहुत कमसिन हो, गोरी हो, तेरे चुचे लड़की जैसे हैं।

मैं हूँ ही लड़की ! मेरे राजा !”

मुझे अपनी बाँहों में भरते हुए उसने मेरे होंठ में होंठ डाल दिए, मेरे चुचे दबाते दबाते मेरे होंठ चूसता गया और नीचे से जिस्म से जिस्म रगड़ते गए।

मैंने उसका अंडरवियर उतार फेंका और उसके लंड को दबोच लिया- कितना बड़ा लंड है आपका !

“पसंद आया मेरी जान?”

“एक बात कहूँ, मैंने आपका लंड देखा है, नहाते की विडियो से, तभी तो मैंने दूरियां मिटाने के लिए शराब का सहारा लिया है।”नीचे सरक उसकी जांघें फैला बीच में लेट गई, उनके लंड को चाटने लगी।

“हाय मेरी जान, ऐसा आज तक नहीं किसी ने किया !”

मैंने पूरा लंड मुँह में ले लिया, लेकिन जल्दी वो तन गया, तब मुँह में डालना मुश्किल था।

“आज से आप मेरे सरताज हो, मैं आपकी दासी, आपकी बीवी !”

“उफ़ मेरी जान !”

वो लंड हिलाने लगा। कई दिन से उसने किसी को ठोका नहीं था, ऊपर से पहली बार मुंह में दिया था, उसका झड़ने लगा, थोडा रस मुँह में गया, मैंने जल्दी से निकाल अपने चूचों पर माल गिरवा लिया।उठकर बाथरूम गए, एक साथ नहाते नहाते मैंने उसको दुबारा तैयार कर लिया, वापस बिस्तर में आकर लंड चूसने लगा।

वो मेरी गांड का छेद चाटने लगा, कुछ देर स्वाद लेकर उसने मेरी टांगें फैलवा ली, बीच में बैठ गांड के नीचे गद्दी लगा कर उसने लण्ड गीला करके मेरी गांड में डाल दिया।

“औ अह ! सरताज, धीरे धीरे करो !”

“हट साली !”

कहकर उसने पूरा लुल्ला पेल दिया। पूरा आधा घंटा उसने अपने घंटे से मेरी गांड को कई तरीकों से बजाया और आखिर में अपने गर्म रस से मेरी गांड की खुजली, गांड की प्यास, मेरे तन की आग को ठंडी किया।

हम नंगे सो गए। सुबह मेरी आंख तब खुली जब वो मेरे होंठों पर लंड रखे हुए घिस रहा था।

मैंने भी मुँह खोल दिया। मुझे सुबह सुबह बहुत सेक्स चढ़ता है। दस मिनट उसने मुझसे लंड चुसवाया और फिर बीस मिनट मुझे चोदा। मुझे बहुत मजा आया !

फिर हर रात मेरी लैला चुदने लगी, वो दारु पीकर आता और मुझे देर रात तक मसलता, सुबह उसकी आंख नहीं खुलती थी।

वो ड्यूटी से लापरवाह हो गया, उसको निकाल दिया और कुछ दिन मेरे साथ और रुकने के बाद वो अपने शहर लौट गया।

जल्दी लिखूंगा कि उसके जाने के बाद कौन मेरा सरताज बना।

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ट्रेन में चार से गाण्ड मरवाई

मैं अन्तर्वासना का आभारी हूँ कि इसमें अब तक न जाने मेरी कितनी चुदाइयो को प्रकाशित किया है।

और मैं पाठकों का भी आभारी हूँ कि उन्होंने मुझे इतना प्यार दिया है। उम्मीद है यह प्यार बना रहेगा।

अपनी एक और चुदाई लेकर आपके सामने आया हूँ।

मुझे दिल्ली जाना पड़ा, काम ऐसा था कि मैंने अपने कई परम मित्रों को नहीं बताया जो मुझे रोज़ कहते रहते हैं कि सनी दिल्ली आ जा, दिल्ली आ जा !

काम निपटा कर मुझे उसी शाम को हर हालत में वापस पंजाब लौटना था, लोकल में सफ़र करते मुझे एक लौड़ा भी मिल गया था, वैसे एक बात बताना चाहता हूँ कि मुझे मर्दों को उत्तेजित करने में अधिक मजा मिलता है।

भीड़ में उनको समझाना कि मैं गाण्डू हूँ, घिसा-घिसाई करके बहुत बहुत मजा आता है।

लोकल में मैंने एक लौड़ा पटाया, मैं उसके आगे था, थोड़ी देर रुक कर मैंने उसकी तरफ देखा, मुस्कुराया, अपना होंठ चबाया, फिर घूम गया, अपनी गाण्ड को उसकी जींस पर रगड़ने लगा।

वो एकदम बोला- साले, मेरे पास आज वक़्त नहीं है, जगह भी नहीं है, इसलिए आगे बढ़ !

दोस्तो, अरमानों को ख़ाक कर के मैं ठेके पर गया, जूस में एक पाऊआ डलवाया, उसको पीकर स्टेशन पहुँचा।

टाटा मूरी एक्सप्रेस सबसे पहले जाने वाली थी, मैंने जनरल का टिकट लिया, वहाँ खड़ा हो गया जहाँ जनरल डिब्बे के रुकने की आस थी।

तभी कुछ बिहारी लोग मेरे पास आ खड़े हुए- ए चिकने ! टाटा मूरी यहीं आएगी?

“हाँ हैण्डसम !” धीरे से बोला- यहीं आएगी, कहाँ जाना है?

“पंजाब।”

“तुमने?”

“मुझे भी वहीं जाना है।”

दूसरा उससे बोला- बहुत प्यास लगी है, बोतल भर लातें हैं।

“मुझे भी जाना है।”

वो मेरे पीछे था, मैंने अपनी गाण्ड उसके लौड़े पर घिसाई, इतने में बोतल भर गई। मैंने मुड़कर देखा, उसने मुस्कान बिखेरी, मैंने होंठ चबा कर उसका जवाब दिया। बस मैं जब लौटा, वो भी आया, उसने उन सब को कुछ कहा, सभी मुझे देखने लगे।

ट्रेन आते सभी झपट पड़े, वो भी मेरे पीछे थे, मैंने एक सीट पर छलांग लगाई, वो भी हम तीन बैठ सके, दो उसके साथी, एक मैं।

मुझे मालूम था ट्रेन मेरठ से अगले स्टेशन तक काफी खाली होगी।

जो पीछे से आ रहे थे, सब झपकियाँ ले रहे थे, उनमें से एक जो खड़ा रह गया था, मैंने उसके ही लौड़े पर गाण्ड रगड़ी थी, वो पतला सा था, बोला- की तुम तीनों बैठ हो ! क्या मैं तुम तीनों के पीछे लेट जाऊँ? आगे आगे तुम बैठे रहना !

मैं बीच में बैठा था, जब वो लेटा तो उसका लौड़े वाला एरिया मेरी गाण्ड के बिल्कुल सामने आ गया था। मैंने भी लोअर पहना था, ट्रेन में रात के सफर में मैं लोअर पहनता हूँ, उतारने और डालने में परेशानी नहीं होती।

मैंने गाण्ड को पीछे धकेला, उसके लौड़े पर दबाव पड़ा, उसने आगे धकेला। साथ वाले दोनों मुस्कुरा रहे थे, उसने टांग ऊपर रख ली ताकि मैं और उनका दोस्त जो कर रहे थे, वो किसी को दिखे ना !

उसने लुंगी पहनी थी, टांग ऊपर रख उसने मुझे इशारा किया, मैंने देखा, वह लुंगी साइड पे करके कच्छे की साइड से लौड़ा दिखा रहा था।

हाय ! काला लौड़ा देख मेरी गाण्ड में कुछ होने लगा। मैंने गाण्ड और रगड़ी, हाथ पीछे ले जा कर उसके लौड़े को सहलाया और लोअर खिसका उसके लौड़े को चीर में रगड़ा।

बोला- क्या कोमल गाण्ड है तेरी !

इधर वाले ने भी अखबार आगे रख मुझे लौड़े के दर्शन करवाए।

जगाधरी पहुँच ट्रेन काफी खाली हो गई, रात के बारह बजे थे, मैं उठा, “बाथरूम में हूँ दायें वाले में ! पहले दो लोग आ जाओ !”

उसमे इंग्लिश सीट थी, मौका देख दोनों वहाँ आ गए, बोले- साले, पागल कर रखा था तबसे तेरी गाण्ड ने ! इसकी माँ अब चुदेगी साली !

मैंने लोअर उतार रख दिया और ऊपर से भी नंगा हो गया। मेरे लड़की जैसे मम्मे देख उनके मुँह में पानी आ गया। गुलाबी निप्पल थे, एक बाल नहीं छोड़ा था मैंने !

“हाय तू तो लड़की जैसी है साली !”

उसने मेरा मम्मा दबाया और निप्पल चूसने लगा। मैंने दोनों के लौड़े पकड़ लिए, मैं सीट पर बैठ गया, एक पाँव के बल बैठ मेरे निप्पल काट-चूस रहा था, एक का लौड़ा मेरे मुँह में था।

वो बोला- साले, तुझे मजा आता है यह सब करवा कर? तेरा मर्द नहीं जागता?

“माँ चुदाये मर्द ! मैं इस वक़्त लड़की हूँ ! रण्डी ! समझे?”

सीट का ऊपर का ढक्कन भी रख दिया और उसपे कोहनियाँ टिका कर घोड़ी बन गया।

“रुको रुको ! मेरा लोअर देना ज़रा !” मैंने उसमें से उनको कंडोम निकाल कर दिए- लगाओ इसको, महंगा है, ध्यान से !

उसने लगाया और झटका लगाया, लौड़ा चीरता हुआ गाण्ड के अन्दर घुस गया, उसने एक और झटका दिया पूरा उतर गया। उनके लौड़े बहुत बड़े नहीं साधारण से लौड़े थे।

दूसरा बोला- कहे तो तुझे अमृत पिला दूँ? मेरा दिल मुँह में छूटने को है !

“बहनचोद, नहीं !”

जोर जोर से झटके लगने लगे, आठ नौ मिनट में वो निपटा, मैंने दूसरे से कहा- शेरा रेडी है?

अबकी बार सीट पर बैठ टाँगें उठा ली, उसने बीच में आकर टांगें उठाई और घुसा दिया, बोला- हाय रानी, कितनी मस्त गाण्ड है तेरी ! उसने साथ में मेरे मम्मो का कीमा बना दिया, दाँतों के लाल लाल निशान बना दिए।

पहले वाले ने कंडोम फेंका और लौड़ा मुँह में दिया, बोला- साफ़ कर !

मैंने चाट कर साफ़ किया, दूसरे वाले ने मेरी रेल बना दी, जोर जोर से चुदने लगा मैं।

जब उसका निकला, उसने उसी पल निरोध खींचा, गीला लौड़ा मुँह में देकर बोला- चाट दे !

दोनों ने मुझे ठोकने के बाद कहा- रुक, उनको भेजते हैं।

बाकी दोनों भी पांच मिनट में वहाँ आ गए, मुझे नंगी देख पागल हो उठे। मैंने उनको नंगा किया- हाय उनके बहुत बड़े बड़े लौड़े थे।

बोले- तू तो लड़की से भी बड़ा माल है।

मेरे मम्मे चूसने लगे, खींच खींच और कीमा बनाने लगे। मैंने भी उनके लौड़ों को मुँह में डाला और चूसने लगा, कभी एक का, कभी दूसरे का।

उसको सीट पर बिठा दिया उसका लौड़ा खड़ा था टांगें दोनों तरफ कर में उस पर बैठने लगा।

“वाह मेरी रानी, तू महान है !” साथ साथ वो मेरा मम्मा चूस रहा था और दूसरे का मेरे मुँह में था, जब वो झड़ा, दूसरा बोला- मैं घोड़ी बनवाऊँगा।

मैं घोड़ी बन गया और उससे भी डलवा लिया, जोर जोर से चुदने लगा। सभी से चुदकर जब हम सीटों पर बैठे, मुस्कुराने लगे थे सारे !

लुधिआना निकल गया तो डिब्बा बिल्कुल खाली था, हम पांच थे और चार पांच बुजुर्ग ! मैंने चारों के लौड़े वहीं निकाल लिए, चूसने लगा बत्ती बुझा कर।

मैंने लोअर खिसकाया, घोड़ी बन गया- जिसने दुबारा मारनी है, घुसा दो !

अमृतसर तक आते आते में उनसे दो दो बार ठुक चुका था।

मुझे ऐसा सफर कभी नहीं भूलेगा, तभी आपके साथ शेयर कर रहा हूँ।

उम्मीद है जल्दी अपने सभी नेट फ़्रेंड्स से गाण्ड मरवा कर उनके उलाहने उतार दूँगा।

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