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सोती हुई माँ की चूत चाटी – पार्ट 1

मेरे घर में मै, मेरी माँ, मेरी पत्नी और मेरी बहन है, मेरी बहन की शादी हो चुकी है और वो अपने ससुराल मे रहती है। मै अपनी माँ और पत्नी के साथ यहाँ कोलकाता मे रहता हूँ। हम लोग बनारस (उ.प.) से यहाँ बचपन मे ही आ गये थे और यही बस गये।

मेरी उम्र 28 साल की है और मेरी पत्नी 24 की है। मेरी सास और मेरी साली अभी भी बनारस के पास एक गांव मे रहते है और साल मे 2-3 महीने हमारे यहाँ आते है। सच पूछो तो मेरा घर एक स्वर्ग है, जहाँ किसी भी तरह की कोई मनाही नही है।

मै आपको शुरू से सारी बात बताता हूँ…

यह बात मेरे बचपन की है, घर पर मेरी माँ, मेरी दीदी और मै सब साथ रहते थे। मेरी उम्र करीब 18-19 के आस पास थी, मेरी लंबाई 5’7” की है। मेरी दीदी की उम्र 18 साल है, उसकी स्पोर्ट्स मे रूचि थी और वो स्टेडियम जाती थी। मेरी माँ टीचर है, उसकी उम्र 37-38 की होगी, मगर देखने मे किसी भी हालत मे 31-32 से ज्यादा की नही लगती थी, माँ और दीदी एकदम गोरे है।

माँ मोटी तो नही लेकिन भरे शरीर वाली थी और चूतड़ उनके चलने पर हिलते थे, उनकी शादी बहुत जल्दी हो गयी थी। मेरी माँ बहुत सुंदर और हँसमुख है, वो जिंदगी का हर मज़ा लेने मे विश्वास रखती है।

हालाकि वो सबसे ओपन नहीं होती है, पर मैने उन्हें कभी किसी बात पर गुस्सा होते हुए नही देखा। ये बात उस समय की थी जब मैं 9th मे था और हर चीज के बारे मे मेरी इच्छा बढ़ रही थी, स्पेशली सेक्स के बारे मे।

मेरे स्कूल के दोस्त अक्सर लड़की पटा कर मस्त रहते थे, उन्ही मे से दो तीन दोस्तो ने अपने परिवार के साथ सेक्स की बाते भी बताई तो मुझे बड़ा अज़ीब लगा। मैने माँ को कभी उस नज़र से नही देखा था पर इन सब की बातों को सुन-सुन कर मेरे मन मे भी इच्छा बढ़ने लगी और मै अपनी माँ को ध्यान से देखने लगा।

चूँकि गर्मियों की छुट्टियाँ चल रही थी और में हमेशा घर पर ही रहता था। घर में, मै माँ के साथ ही सोता था और दीदी अपने कमरे मे सोती थी। माँ मुझे बहुत प्यार करती थी, माँ, दीदी और मै आपस मे थोड़ा खुले हुए थे।

हालाकि सेक्स करने की कोई बात तो नही हुई थी पर माँ कभी किसी चीज का बुरा नही मानती थी और बड़े प्यार से मुझे और दीदी को कोई भी बात समझाती थी।

कई बार अक्सर उत्तेजना की वजह से जब मेरा लंड खड़ा हो जाता था और माँ की नज़र उस पर पड़ती तो मुझे देख कर धीरे से मुस्कुरा देती और मेरे लंड की तरफ इशारा करके पूछती कोई परेशानी तो नही है।

मै कहता “नही” तो वो कहती कोई बात नही… तो मै भी मुस्कुरा देता।

वो खुद कभी-कभी हम दोनो के सामने बिना शर्माये एक पैर बेड पर रख कर साड़ी थोड़ा उठा देती और अन्दर हाथ डालकर अपनी चूत खुजलाने लगती। नहाते समय या हमारे सामने कपड़े बदलते वक़्त अगर उनका नंगा बदन दिखाई दे रहा हो तो भी कभी भी शरीर को ढकने या छुपाने की ज़्यादा कोशिश नही की।

ऐसा नही था की वो जान बुझ कर दिखाने की कोशिश करती हो, क्योंकी इन सब के बाद भी मैने उनकी या दीदी की नंगी चूत नही देखी थी। बस वो हमेशा हमे नॉर्मल रहने को कहती और खुद भी वैसे ही रहती थी।

धीरे धीरे मै माँ के और करीब आने की कोशिश करने लगा। और हिम्मत कर के माँ से उस वक़्त पास आने की कोशिश करता जब मेरा लंड खड़ा होता है। मेरा खड़ा लंड कई बार माँ के बदन से टच होता पर माँ कुछ नही बोलती थी। इसी तरह एक बार माँ किचन मे काम कर रही थी और माँ की हिलते हुए चूतड़ देख कर मेरा लंड खड़ा हो गया।

मैने अपनी किस्मत आज़माने की सोची और भूख लगने का बहाना करते हुए किचन मे पहुँच गया और माँ से बोला “माँ भूख लगी है कुछ खाने को दो.. ” और ये कहते हुए माँ से पीछे से चिपक गया।

मेरा लंड उस समय पूरा खड़ा था और मैने अपनी कमर पूरी तरह माँ के गांड से सटा रखी थी जिसके कारण मेरा लंड माँ के गांड के बीच थोड़ा सा घुस गया था।

माँ हंसते हुए बोली “क्या बात है आज तो मेरे बच्चे को बहुत भूख लगी है..”

“हां माँ, बहुत ज्यादा, जल्दी से मुझे कुछ दो..”

और मैने माँ को और ज़ोर से पीछे से पकड़ लिया और उनके पेट पर अपने हाथो को कस कर दबा दिया, कस कर दबाने की वज़ह से माँ ने अपने चूतड़ थोड़े पीछे किये जिससे मेरा लंड थोडा और माँ की गांड के बीच मे घुस गया। उत्तेजना की वज़ह से मेरा लंड झटके लेने लगा पर में वैसे ही चिपका रहा और माँ ने हंसते हुए मेरी तरफ देखा पर बोली कुछ नही।

फिर माँ ने जल्दी से मेरा खाना लगाया और थाली हाथ मे लेकर बरामदे मे आ गई, मै भी उसके पीछे पीछे आ गया। खाना खाते हुए मैने देखा तो माँ मुझे और मेरे लंड को देख कर धीरे धीरे हंस रही थी। जब मैने खाना खा लिया तो माँ बोली की अब तू जाकर आराम कर, मै काम कर के आती हूँ… पर मुझे आराम कहा था, मै तो कमरे मे आकर आगे का प्लान बनाने लगा की कैसे माँ को चोदा जाए।

क्योंकि आज की घटना के बाद मुझे पूरा विश्वास हो गया था की अगर में कुछ करता भी हूँ तो माँ अगर मेरा साथ नही देगी तो भी कम से कम नाराज़ नही होगी। फिर ये ही हरकत मैने 5-6 बार की और माँ कुछ नही बोली तो मेरी हिम्मत और बढ़ी।

एक रात खाना खाने के बाद मै कमरे मे आकर लाइट ऑफ कर के सोने का नाटक करने लगा, थोड़ी देर बाद माँ आई और मुझे सोता हुआ देख कर थोड़ी देर कमरे मे कपड़े और समान ठीक किया और फिर मेरे बगल मे आकर सो गई।

करीब एक घंटे के बाद जब मुझे विश्वाश हो गया की माँ अब सो गयी होगी तो मै धीरे से माँ के ऊपर सरक गया और धीमे धीमे अपना हाथ माँ के चूतड़ों पर रख कर माँ को देखा। जब माँ ने कोई हरकत नही की तो मै उनकी गांड को सहलाने लगा और उनकी साड़ी के ऊपर से ही दोनो चूतड़ों को हाथ से धीमे धीमे दबाने लगा।

जब उसके बाद भी माँ ने कोई हरकत नही की तो मेरी हिम्मत थोड़ी और बढ़ी और मैने माँ की साड़ी को हल्के हल्के ऊपर खिचना शुरु किया।

ऊपर करते करते जब साड़ी चूतड़ों तक पहुँच गई तो मैने अपना हाथ माँ की गांड के ऊपर रख कर थोड़ी देर माँ को देखने लगा, पर माँ ने कोई हरकत नही की।

फिर मै अपना हाथ उनकी गांड के छेद से धीरे धीरे आगे की और करने लगा, पर माँ की दोनो जांगे आपस मे सटी हुई थी जिससे में उन्हे खोल नही पा रहा था, फिर मैने अपनी दो उंगलिया आगे की और बड़ाई तो मेरी साँस ही रुक गई क्युकी मेरी उंगलिया माँ की चूत के ऊपर पहुँच गई थी।

फिर मै धीरे धीरे अपनी उंगलियो से माँ की चूत सहलाने लगा, माँ की चूत पर बाल महसूस हो रहे थे, चूँकि मेरे लंड पर भी बाल थे तो में समझ गया की ये माँ के बाल है। इतनी हरकत के बाद भी माँ कुछ नही कर रही थी तो मैने धीरे से अपनी पूरी हथेली माँ के चूत पर रख दी और चूत के दोनो होंठो को एक एक कर के छूने लगा।

तभी मुझे महसूस हुआ की माँ की चूत से कुछ मुलायम सा चमड़े का टुकड़ा लटक रहा है। जब मैने उसे हल्के से खींचा तो पता चला की वो माँ की चूत की पूरी लंबाई के बराबर चूत यानी ऊपर से नीचे तक की लंबाई मे बाहर की तरफ निकला हुआ था और जबरदस्त मुलायम था।

उस समय मेरा लंड इतना टाइट हो गया था की लगा जैसे फट जाएगा, मै धीरे से उठ कर बैठ गया और अपने सारे कपड़े उतार कर लंड को माँ के गांड से सटाने की कोशिश करने लगा, पर कर नही पाया। तो मै एक हाथ से माँ की चूत मे उंगली डाल कर बाहर निकले चमड़े को सहलाता रहा और दूसरे हाथ से मुठ मारने लगा।

2-3 मिनट मे ही मैं झर गया पर जब तक में अपना जूस रोक पाता वो माँ के चूतड़ों पर पूरा गिर चूका था, ये देख कर में बहुत डर गया और चुपचाप कपड़े पहन कर माँ को वैसा ही छोड़ कर सो गया।

सुबह जब में उठा तो देखा की माँ रोज की तरह अपना काम कर रही थी और दीदी हाकी की प्रेक्टीस जो सुबह 6 बजे ही शुरू हो जाती थी, जा चुकी थी।

मैं डरते डरते बाथरूम की तरफ जाने लगा तो माँ ने कहा आज चाय नही मांगी तूने…

तो मैने बात पलटते हुए कहा की “हा पी रहा हूँ, पेशाब कर के आता हूँ..”, जब मैं बाथरूम से वापस आया तो देखा माँ बरामदे मे बैठी सब्जी काट रही थी और वही पर मेरी चाय रखी हुई थी।

मै चुपचाप बैठ कर चाय पीने लगा तो माँ मेरी तरफ देख कर हंसते हुए बोली की ”आज बड़ी देर तक सोता रहा” हां माँ, नींद नही खुली.. तो माँ बोली “एक काम किया कर आज से रात को और जल्दी सो जाया कर..” ये कह कर वो हंसते हुए किचन मे चली गयी।

जब मैने देखा की माँ कल रात के बारे मे कुछ भी नही बोली तो में खुश हो गया, उस दिन पूरे दिन मैने कुछ भी नही किया, मेने सोच रखा था की अब मै रात को ही सब कुछ करूँगा जब तक या तो माँ मुझसे चुदाई के लिए तैयार ना हो या मुझे डाट नही देती।

रात को मै खाना खा कर जल्दी से रूम मे आकर सोने का नाटक करने लगा, थोरी देर मे माँ भी दीदी के साथ आ गई, उस दिन माँ बहुत जल्दी काम ख़त्म करके आ गई थी, खैर मै माँ के सोने का इंतजार करने लगा।

थोरी ही देर मे दीदी के जाने के बाद माँ धीरे से बेड पर आकर लेट गई, करीब एक घंटे तक लेटे रहने के बाद मैने धीरे से आँखे खोली और माँ की तरफ सरक गया। थोड़ी देर मे जब मैंने बरामदे की हल्की रोशनी मे माँ को देखा तो चौंक गया।

माँ ने आज साड़ी की जगह नाईटी पहन रखी थी और उन्होने अपना एक पैर थोडा आगे की तरफ कर रखा था, फिर मैने सोचा की अगर ये किस्मत से हुआ तो अच्छा है और अगर माँ जानबूझ कर यह कर रही है तो माँ जल्दी ही चुद जाएगी, उस रात मेरी हिम्मत थोड़ी बढ़ी हुई थी।

थोड़ी देर नाईटी के ऊपर से माँ का चूतड़ सहलाने के बाद मैने धीरे से माँ की नाईटी के सामने का बटन खोल दिया, और उसे कमर तक पूरा हटा दिया, और धीरे से माँ के चूतड़ों को सहलाने लगा।

मैं जांघो को भी सहला रहा था, माँ की चूतड़ और जांघे इतने मुलायम थे की मै विश्वास नही कर पा रहा था। फिर मैने अपना हाथ उनकी जांगो के बीच डाला तो मैं हैरान रह गया, माँ की चूत एकदम चिकनी थी।

उनके चूत पर बाल का नामोनिशान नही था, उनकी चूत बहुत फूली हुई थी और चूत के दोनो होंठ फैले हुए थे शायद एक जांग आगे करने के कारण उनकी चूत से निकला हुआ चंदा लटक रहा था। (मेरे कई दोस्तों ने उसके बारे मे बताया था की उनके घर की ओंरतो की चूत से भी ये निकलता है और उन्हे इस पर बड़ा नाज़ होता है)

मै तो उत्तेजना की वज़ह से पागल हो रहा था, मैने लेटे-लेटे ही अपने कपड़े निकाल दिया और माँ की तरफ थोडा और सरक गया जिससे मेरा लंड माँ के गांड से टच करने लगा।

थोड़ी देर तक चुप रहने के बाद जब मैने देखा की माँ कोई हरकत नही कर रही है तो मेरी हिम्मत और बढ़ी, मै लेटे लेटे ही माँ की चूत को सहलाने का पूरा मज़ा लेने लगा।

थोड़ी ही देर मे मुझे लगा की माँ की चूत से कुछ चिकना चिकना पानी निकल रहा है, क्या खुशबु थी उसकी, मेरा लंड फूल कर फटने की इस्थिति मे हो गया। मै अपना लंड माँ की गांड के छेद, उनकी जांघो पर धीमे धीमे रगड़ने लगा।

तभी मुझे एक आईडिया आया की क्यों ना आज थोडा और बढ़ कर माँ की चूत से अपना लंड टच करूं, जब मैने अपनी कमर को आगे खिसका कर माँ की जांघो से सटाया तो लगा जैसे करंट फैल गया हो।

मुझे झड़ने का जबरदस्त मन कर रहा था पर मैने सोचा की एक बार माँ की चूत मे लंड डाल कर उनकी चूत के पानी से चिकना कर लूँगा और फिर बाहर निकाल कर मुठ मार लूँगा।

ये सोच कर मैने अपनी कमर थोडा ऊपर उठाया और अपना लंड माँ की चूत से लटके चमड़े को उंगलियों से फैलाते हुए उनके छेद पर रखा तो माँ की चूत से निकलते हुए चिकना पानी मेरे लंड पर लिपट गया, और थोडा कोशिश करने पर मेरा लंड माँ की चूत के छेद मे घुस गया।

जैसे ही लंड अंदर गया उफ़ माँ की चूत की गर्मी मुझे महसूस हुई और जब तक मै अपना लंड बाहर निकालता मेरे लंड से वीर्य का फव्वारा माँ की चूत मे पिचकारी की तरह निकलने लगा।

मै घबरा तो गया पर ज्यादा हिलने से डर रहा था की कहीं माँ जग ना जाए, जब तक मैं धीमे से अपना लंड माँ की चूत से निकालता तब तक मेरे लंड का पानी माँ की चूत मे पूरा खाली हो चूका था और लंड निकलते वक़्त वीर्य की धारा माँ के गांड के छेद पर बहने लगी।

मुझे लगा अब तो मै पक्का पीटूँगा और डर के मारे जल्दी से कपड़े पहन कर सो गया, मुझे नींद नही आ रही थी पर मैं कब सो गया पता ही नही चला।

अगले दिन उठा तो देखा की हमेशा की तरह माँ सफाई कर रही थी पर दीदी स्टेडियम नही गई थी। मुझे देखते ही माँ ने दीदी से कहा “वीना, जा चाय गर्म करके भाई को देदे… और मुझे प्यार से वहीं बैठने के लिए कहा।

मैने चोरी से माँ की तरफ देखा तो माँ मुझे देख कर पूछी आज नींद कैसी आई… मैने कहा की “अच्छी”,

तो माँ हसने लगी और मेरी पैंट की ऊपर देखकर बोली की “अब तू रात मे सोते समय थोड़े ढीले कपड़े पहना कर… अब तू बड़ा हो रहा है.. देख मै और वीनू भी ढीले कपड़े पहन कर सोते है… मै यह सुन कर बड़ा खुश हुआ की माँ ने मुझे डाटा नही।

उस दिन मुझे पूरा विश्वास हो गया था की अब माँ मुझे रात मे पूरे मज़े लेने से मना नही करेगी भले ही दिन मे चुदाई के बारे मे खुल कर कोई बात ना करे।

अब तो मै बस रात का ही इंतजार करता था, खैर उस रात फिर जब मै सोने के लिए कमरे मे गया तो मुझे माँ की ढीले कपड़े पहनने वाली बात याद आई पर मेरे पास कोई ढीले कपड़े नही थे। फिर मैने आलमरी मे से एक पुरानी लुंगी निकाली और अंडरवेयर उतार कर पहन लिया और सोने का नाटक करने लगा।

तभी मेरे मन मे माँ की सुबह वाली बात चेक करने का विचार आया, और मैने अपनी लुंगी का सामने वाला हिस्सा थोडा खोल दिया जिससे मेरा लंड खड़ा होकर बाहर निकल गया और अपने हाथो को अपनी आँखो पर इस तरह रखा की मुझे माँ दिखाई दे।

थोरी ही देर मे माँ कमरे मे आई और नाईटी पहन कर बेड पर आने और लाइट ऑफ करने के लिए मूडी और मेरे लंड को देखते ही रुक गई।

थोड़ी देर वैसे ही मेरे लंड को जो की पूरे 6 इंच” लंबा और 1.5” मोटा था, देखती रही। फिर पता नही क्यों उसने लाईट बंद करके नाईट बल्ब जला दिया और बेड पर लेट गई।

वो मेरे लंड को बड़े प्यार से देख रही थी पर मेरे लंड को उसने छुआ नही, फिर दूसरी तरफ करवट बदल कर एक पैर को कल की तरह आगे फैला कर लेट गई।

मुझे पक्का विस्वाश था की आज माँ जानबूझ कर नाईट बल्ब ऑन किया है ताकि में कुछ और हरकत करू।

आधे एक घंटे के बाद जब मै माँ के ऊपर सरका तो लूँगी की गाँठ रगड से अपने आप ही खुल गई और मै नंगे ही अपने खड़े लंड को लेकर माँ की तरफ सरक गया और निचे से नाईटी सरककर ऊपर कमर तक सटा दिया।

उस रात मैने पहली बार माँ के कुल्हे, गांड और चूत को देख रहा था, मेरी खुशी का ठिखाना नही था, मै झुक कर माँ की जांगो और कुल्हे के पास अपना चेहरा ले जाकर चूत को देखने की कोशिश करने लगा।

मुझे अपनी आँखो पर विश्वास नही हो रहा था की कोई चीज इतनी मुलायम, चिकनी और सुन्दर हो सकती है, माँ की चूत से बहुत अच्छी भीनी भीनी खुशबु आ रही थी, मै एकदम मदहोश होता जा रहा था।

पता नही कैसे मै अपने आप ही माँ की चूत को नाक से सटा कर सूंघने लगा, चूत से निकले हुए चंदे के दोनो पत्ते किसी गुलाब की पंखुड़ी से लग रहे थे।

माँ की चूत का छेद थोडा लाल था और गांड का छेद काफ़ी टाइट दिख रहा था, पर सब मिला कर उनकी पुरे चूतड़ और जांघे बहुत मुलायम थी।

मै उसी तरह कुछ देर सूंघने के बाद माँ के चूत के दोनो पत्तो को मुहँ मे भर लिया और चूसने लगा उनकी चूत से बेहद चिकना लेकिन नमकीन पानी निकलने लगा।

मै भी आज चुदाई के मज़े लेना चाहता था, फिर मैने माँ की चूत से निकलते हुए पानी को अपने लंड पर लपेटा और धीरे से माँ की चूत मे डालने की कोशिश करने लगा, पर पता नही कैसे आज मेरा लंड बड़ी आसानी से माँ की चूत के छेद मे घुस नहीं रहा था।

मै वैसे ही थोड़ी देर रुका रहा फिर मैने लंड को अंदर डालना शुरू किया, दो तीन प्रयासो मे मेरा लंड माँ के चूत मे घुस गया ओह क्या मज़ा आ रहा था।

माँ की चूत काफ़ी गर्म थी और मेरे लंड को चारो और से जकड़े हुए थी, थोड़ी देर उसी तरह रहने के बाद मैने लंड को अंदर बाहर करना शुरू किया ओह जन्नत का मज़ा मिल रहा था।

4-5 मिनट अंदर बाहर करते ही मुझे लगा की मैं झड़ने वाला हूँ तो मैने अपनी स्पीड और तेज़ कर दी और अपना वीर्य माँ की चूत मे डाल दिया…

और माँ के कपडे ठीक करके चैन की नींद सो गया…

स्टोरी अगले भाग में जारी रहेगी…..

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