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मेरी बीवी का रंडीपन बढ़ता गया

हैलो फ्रेंड्स, मैं स्वप्निल

ऑफिस से कॉल करता तो बोलती- ठीक हूँ, किसी से चुद नहीं रही हूँ.
कभी फ़ोन कट कर देती, कभी बोलती बार बार कॉल करके नज़र रखते क्या … या कहती कि कॉल करके परेशान मत किया करो.

मैंने भी कॉल करना बंद कर दिया.

लगभग एक हफ्ते बाद मैं एक जरूरी फाइल लेने घर आया.
उस समय लगभग दो बज रहे थे.

मैं बाइक खड़ा करके उतरा और गेट तक पहुंचा.

गेट बंद था तो सोचा कि शायद अरुणिमा सो रही होगी.
मुझे उसको उठाना मुझे ठीक नहीं लगा तो मैंने अपने चाभी से दरवाजा खोल लिया.

मैं बरामदे से अन्दर ड्राइंग रूम में जा रहा था कि मुझे अरुणिमा की आवाज सुनाई दी.
‘बाबू को मम्मी का दुधु पीना है? नहीं आ रहा मुँह में? पापा को बोलो जोर से चोदे मम्मी को … तब तो दुधु आएगा.’

मैंने दरवाजे पर लगे परदे को जरा सा हटा कर अन्दर झांका. अन्दर सोफा टेबल पर अरुणिमा नंगी पड़ी थी. दो लड़के टेबल के दोनों तरफ बैठ कर उसके निप्पल्स को चूस रहे थे.

उसके नीचे की तरफ एक और लड़का खड़ा था जो अरुणिमा की जांघों को पकड़ कर उसकी चूत चोद रहा था.

उसके सर के ऊपर की तरफ एक और लड़का खड़ा था, जिसका लंड थूक से गीला था.
इसका ये मतलब था कि थोड़ी देर पहले अरुणिमा उसका लंड चूस रही थी.

मुझे विश्वेश्वर जी पर बड़ा गुस्सा आ रहा था इसलिए मैं दबे पांव बाहर आया और तुरंत विश्वेश्वर जी को कॉल किया.

उन्होंने दो बार तो कॉल काट दिया.

पर तीसरी बार झल्ला कर उठाया, उन्होंने कड़क कर पूछा- क्या हुआ भड़वे?

मैंने आवाज में नर्मी लाते हुए कहा- आप मुझसे इतना क्यों नाराज हैं? अरुणिमा को आप चारों ने चोद लिया. एक बार का आवेश सोच कर मैंने आप सबके कहने पर उसे अहसास करवाया कि मेरी मर्जी शामिल थी. उसके बाद आप लोगों ने रोज का रूटीन बना लिया. जब जैसे मर्जी पड़ी, उसे चोदते रहे. कभी मेरे घर पर कभी कहीं और. मैंने उस पर भी कोई प्रतिरोध नहीं किया. लेकिन आप फिर भी इतना गुस्सा हैं कि पता नहीं मुझसे क्या गलती हो गई?

ये बोल कर मैं चुप हो गया.
तो विश्वेश्वर जी बोले- सॉरी स्वप्निल! तुम ठीक बोल रहे हो, हम लोग कुछ ज्यादा ही ज्यादती कर रहे हैं. चलो जो हो गया सो हो गया, आइंदा से ऐसा कुछ नहीं होगा. आज के बाद हम चारों में से कोई भी अरुणिमा को और तुम्हें परेशान नहीं करेगा. मैं बाकी लोगों को भी बोल दूंगा, वैसे भी अरुणिमा में मेरी दिलचस्पी खत्म हो गई है. गुरुबचन का मन है थोड़ा … लेकिन मैं उसको कॉल कर दूंगा. उसके बाद उसकी गांड में इतना दम नहीं होगा कि वो मेरी बात काटे. तुम बेफिक्र रहो.

मैंने ताना मार कर कहा- और ये जो गाहे बगाहे अरुणिमा को चोदने के लिए लोग भेज देते हो उसका क्या?
उन्होंने कहा- साले हरामी, एक बार ही तो भेजा था बस!

मुझे झटका लगा, उनकी बात से तो लग रहा था कि जो चार लड़के अन्दर अरुणिमा को चोद रहे थे, उनको यदि विश्वेश्वर जी ने नहीं भेजा है, तो फिर किसने भेजा था.
मैंने उन्हें धन्यवाद बोल कर फ़ोन काट दिया और वापस अन्दर आ गया.

इस बार मैं धड़ल्ले से अन्दर घुस गया.
अरुणिमा की चूत में एक लंड, मुँह में दूसरा और दो लड़के उसके निप्पल्स को चूस रहे थे.
जिसका लंड अरुणिमा के मुँह में था उसने अपना लंड बाहर निकाला.

मैंने अरुणिमा को घूरा, तो उसने कहा- ये लोग विश्वेश्वर जी के ख़ास लोग हैं, उन्होंने भेजा है.
मेरी तो विश्वेश्वर जी से बात हो ही चुकी थी, पर ये बात अरुणिमा को पता नहीं थी.

अगर विश्वेश्वर जी से मेरी बात नहीं हुई रहती, तो अरुणिमा की बात मान भी लेता.
मुझे भी थोड़ी देर पहले यही लगा था.
लेकिन विश्वेश्वर जी से बात करने के पश्चात ये तो तय था कि अरुणिमा साफ़ झूठ बोल रही थी.

मैंने उससे कुछ नहीं कहा और अन्दर जाकर फाइल निकाल कर वापस आया.
वो लोग वैसे ही जड़ रुके हुए थे.

मैं बरामदे में गया और जोर से दरवाजा बंद कर दिया लेकिन मैं अन्दर ही रुक गया.
मैंने परदे के पास कान लगा दिया कि इनकी बात सुन सकूं.

एक लड़का तुरंत बोला- हमें तो किसी विश्वेश्वर जी ने नहीं भेजा है, बल्कि आपने खुद बुलाया है. फिर आपने उस आदमी से झूठ क्यों कहा? कौन था वो आदमी?

अरुणिमा ने तुरंत कहा- भड़वा है साला भोसड़ी वाला! नाम भर पर पति है. उसके कारण मुझे हर किसी मादरचोद से चुदवाना पड़ता है. सब साले अपनी मर्जी से चोदते हैं. जब चुदवाना है ही तो मैंने सोचा की अपनी मर्जी से ना चुदवाऊं. मैं बोलूं तो मेरी चूत चुदे और मैं चाहूँ तो गांड चुदे. इसलिए जब मन होता तो मैं बाहर से लौंडे ले आती हूँ और चुदवा लेती हूँ. जैसे आज तुम लोग बस स्टैंड पर मिल गए और तुम्हें घर ले आई. मुझे डर नहीं था क्योंकि पता था कि अगर भड़वा आ भी जाएगा तो विश्वेश्वर जी का नाम ले लूंगी और चूतिया कुछ बोलेगा नहीं.

दूसरे ने पूछा- आप अब तक अपने मन से कितने बार चुदवा चुकी हो?
अरुणिमा हंस कर बोली- अनेकों बार, पर हमेशा एक या दो ही लौंडे मिले मुझे, पहली बार मुझे तुम चार लौंडे मिले. अब तुम सब मेरा इंटरव्यू लेना बंद करो और चोदना चालू करो.

उसके बाद अन्दर से आवाज आना बंद हो गई और मैं वहां से निकल गया.

मैं अपनी फाइल का काम पूरा भूल गया और गली के मोड़ पर एक चाय दुकान में जाकर बैठ गया.

मैं एक घंटा वहां बिताने के बाद चुपके से घर आया.

घर का गेट खुला हुआ था सो मैं चुपके से अन्दर गया.
ड्राइंग रूम में कोई था नहीं, सो बेडरूम में झांक कर देखा.

अन्दर अरुणिमा खड़ी थी और दो लौंडे उसकी चूत और गांड एक साथ मार रहे थे.
वो भी उछल उछल कर चुदवा रही थी.

मैं फिर से चाय की दुकान पर आ गया और टाइमपास करने लगा.
अगले तीन घंटे में चार बार मैंने घर जाकर झांका और अरुणिमा को लगातार चुदवाते हुए पाया.
कभी गांड मराते, कभी चूत तो कभी लंड चूसते.

तीन घंटे बाद वो चलो लड़के मेरे घर से निकल कर बस स्टैंड की तरफ चल दिए.

मैं थोड़ी देर बाद घर गया तो अरुणिमा को नंगी सोती हुई देखा.
मैं चुपचाप वापस ऑफिस आ गया.

अरुणिमा का बोलना सही था और मुझे उस बात से कोई आघात नहीं लगा था, पर उसका बाहर के लड़कों से चुदवाना मेरे गले से नहीं उतर रहा था.

उसके अन्दर का वेश्यापना अब जाग गया था और उसने सच में रंडियों वाली हरकतें करना चालू कर दी थीं.
उसके लिए जो अफ़सोस था, वो खत्म हो गया था और उस पर मुझे तेज गुस्सा आ रहा था.

तभी मेरे एक जान पहचान वाले कांट्रेक्टर आए और उन्होंने गुस्से में मेरी टेबल पर फाइलों का बंडल पटक दिया.
मैंने चौंक कर उनको देखा तो चेहरे पर परेशानी के भाव दिखे.

मैंने उन्हें बिठाया और कारण पूछा.
उन्होंने कहा कि उसका तीन डिपार्टमेट्स में काम और पेमेंट फंसा हुआ है. अफसर को पैसे भी खिला चुके, पर अभी भी काम और पेमेंट फंसा हुआ है.

मैंने पूछा- उन अफसरों को चाहिए क्या है?
तो उन्होंने बताया कि उन अफसरों को चोदने के लिए माल चाहिए.

मैंने उनसे कहा कि किसी रंडी को बुक करके पहुंचा दे उनके पास.
इस बात पर वो थोड़ा झल्लाए और बोले- यही तो दिक्कत है, सब हरामी हैं साले, उनको रंडी नहीं … कोई घरेलू औरत चाहिए. किसी की बीवी या कोई कॉलेज की लौंडिया.
मैं चुप था.

वो बोले- मुझे खर्चे का फ़िक्र नहीं, वो सब उठा लेंगे, पर सालों को पीस एकदम जोरदार और कम चली हुई होना चाहिए.
मैं उनकी मजबूरी पर हंस दिया तो वो और चिढ़ गए और उठकर चले गए.

उनके जाने के बाद मैं फिर से अरुणिमा के बारे में सोचने लगा.

अचानक मुझे ख्याल आया कि क्यों ना अपनी रंडी बीवी अरुणिमा को ही चुदवा दूँ.
ये सोच कर मैंने उनको कॉल करके बुलाया.

उनके आने के बाद मैंने उनसे कहा कि मेरे पास उनके लायक एक माल है.
उन्होंने तुरंत मुझसे लड़की की नंगी फोटो मांगी. वो निश्चित होना चाहते थे कि लड़की उनके हिसाब की थी.

मेरे पास अरुणिमा की सिंगल फोटो थी नहीं और ना नंगी फोटो थी.

मैंने उनसे एक दो दिन का समय मांगा और घर के लिए निकल गया.
मैं घर ये सोच कर जा रहा था कि अरुणिमा की नंगी फोटो निकालूंगा.

फिर मुझे ख्याल आया कि अरुणिमा को इस फोटो के लिए क्या बहाना बताऊंगा.
ये सोच कर मैं एक जगह रुक गया. मैंने थोड़ा सोच कर विश्वेश्वर जी को कॉल किया.

उन्होंने फ़ोन उठाया और बड़े प्यार से बात करने लगे. मुझे आश्वासन दिया कि जल्द ही वो मुझे कुछ अच्छे बड़े काम दिलवा देंगे.
फिर मैंने उनसे कहा- मैं अरुणिमा की नंगी फोटोशूट करवाना चाहता, कुछ नंगी फोटो और कुछ नंगी वीडियो बनवाना चाहता हूँ.

उन्होंने मुझसे उन्हें कॉल करने का कारण पूछा.
तो मैंने कह दिया कि शहर में किसी से करवाऊंगा तो मुझे ब्लैकमेल करने लगेगा, लेकिन उनके जान पहचान का होगा तो मेरे लिए सेफ रहेगा.

उन्होंने कहा कि कल मैं दो फोटोग्राफर भिजवा दूंगा.
मैंने थैंक्स कहा.

फिर वो मुझसे एक बात बोले कि भले फोटोग्राफर उनके पहचान वाले हैं, पर अरुणिमा जैसे लड़की की नंगी फोटो खींचने के बाद उसे चोदे बिना तो छोड़ेंगे नहीं.
मैंने उनकी बात से सहमति जताई और कह दिया कि मुझे उससे कोई परेशानी नहीं होगी.

उन्होंने कहा कि ठीक है कल ग्यारह बजे सुबह दोनों आ जाएंगे.
मैंने उनसे कहा कि अरुणिमा को ये पता नहीं चलना चाहिए कि ये फोटो वीडियो मुझे चाहिए.

उन्होंने कोई सवाल नहीं किया और मुझे फोटोग्राफर कर नंबर भेज दिया.

मैंने तुरंत फोटोग्राफर को कॉल लगा कर उसे सब कुछ समझा दिया, उसे हिदायत दे दी कि अरुणिमा के सामने मुझसे कोई बात ना करे.

उसने पूछ लिया कि मुझे वीडियो कैसी चाहिए, अकेली उसकी चाहिए या जब वो उसे चोदेगा, तब की भी चाहिए.
मैंने उससे कह दिया कि उसके और उसके साथी के चोदने का भी वीडियो चलेगा मुझे.

उसके बाद मैंने उसे और निर्देश देकर कॉल काट दिया.

अगले दिन सुबह मैंने अरुणिमा से कहा कि विश्वेश्वर जी को उसकी कुछ नंगी फोटो और वीडियो चाहिए.
उसने कोई बहस नहीं की, तो मैंने उससे कहा कि वो अपने बदन की वैक्सिंग कर ले और शेविंग कर ले.

वो चुपचाप बाथरूम गई और वैक्सिंग शेविंग करके आ गई.

बाहर आकर वो नंगी ही घूम रही थी.

मैंने सोचा कि ठोक दूँ, पर फिर ये याद आ गया कि इसका रंडीपना अभी से ही शुरू हो जाएगा और फिर वो दोनों फोटोग्राफर इसको चोदने तो वाले ही हैं. वो लोग आकर कपड़े उतारेंगे ही, उससे अच्छा ये नंगी ही रहे.

ठीक ग्यारह बजे दोनों फोटोग्राफर आ गए.
दोनों की उम्र पच्चीस से तीस के बीच रही होगी. दोनों आकर सोफा पर बैठ गए.

उस समय अरुणिमा किचन में थी.

मैंने उसे आवाज लगाई और दो मिनट बाद वो ड्राइंग रूम में आ गई.
उसको देख कर दोनों सकते में आ गए.
उन्हें बिल्कुल उम्मीद नहीं थी कि अरुणिमा नंगी ही सामने आएगी.

अरुणिमा आकर उनके सामने बैठ गई और दोनों उसके मम्मों को घूरे जा रहे थे.
अरुणिमा ने भी गौर किया और कहा- आप दोनों के लिए चाय लाऊं या थन से सीधा दूध पियोगे?

एक तो झेंप गया पर दूसरा बोला- दूध भी पी लेंगे, फिलहाल चाय ले आइए.
अरुणिमा गई और थोड़े देर में चाय लेकर आ गई.
वो फिर से सामने बैठ गई.

दोनों फोटोग्राफर चाय पीने लगे.
सामने बैठी अरुणिमा अपनी जांघों को फैला कर उनको अपनी चूत दिखाने लगी.

थोड़ी देर उसके यौवन के दर्शन करने के बाद फोटोग्राफी की बात चली.

अरुणिमा दोनों को लेकर पीछे के आंगन में आ गई.
जगह काफी थी और रोशनी भी सो अच्छा फोटो सेशन हो सकता था.

दोनों ने अपने सामान लगाया और अरुणिमा को पोज़ बताने लगे.
अरुणिमा पोज़ बनाती गई और ये लोग फोटो खींचते रहे.

उसके आगे की तरफ से, पीछे की तरफ से और साइड से फोटो लेते रहे.

फिर उसको लेकर बेडरूम में आ गए. बेडरूम में बिस्तर पर लिटा कर उसके फोटो लिए और बिस्तर पर ही उसको कुछ कामुक हरकतें करने को बोले.

वो अश्लील मुद्राएं बनाने लगी और वो दोनों उसकी वीडियो बनाने लगे.
जब सब हो गया तो एक फोटोग्राफर ने दूसरे को अपना कैमरा पकड़ा दिया और कपड़े उतार कर बिस्तर पर चढ़ गया.

अरुणिमा थोड़ा हिचकिचाई तो फोटोग्राफर ने उसे बताया कि अब वो उसे चोदेगा और उसकी वीडियो रिकॉर्डिंग होगी.

उसने अरुणिमा को पास आकर लंड चूसने को बोला.
अरुणिमा थोड़ा हिचकिचा रही थी पर फिर भी आगे आकर उसके लंड को मुँह में लेकर चूसने लगी.

दूसरा फोटोग्राफर एंगल बदल बदल कर उसकी वीडियो बना रहा था.

थोड़ी देर बाद पहले फोटोग्राफर ने उसे रोका और उसे बिस्तर पर लिटा दिया.
वो उसके बदन को चूमने चाटने लगा.

उसने मेरी बीवी के पेट और मम्मों के साथ खेला और उसकी टांगें फैला कर उसकी चूत में लंड डाल दिया.
उसके बाद उसने अरुणिमा को चोदना शुरू किया और साथ में वीडियो रिकॉर्डिंग चलती रही.

थोड़ी देर बाद वो रुका, अपना लंड बाहर निकाला और अरुणिमा को घोड़ी बना कर उसकी गांड में अपना लंड डाल दिया.
रिकॉर्डिंग चलती रही और वो पूरे मजे से उसकी गांड मारता रहा.

आखिरी में वो मेरी बीवी की गांड में झड़ गया.
उसके झड़ने के बाद दूसरे फोटोग्राफर ने उसकी जगह संभाली और खुद लेट गया.

उसने अरुणिमा को उसके ऊपर चढ़ कर उसका लंड अपनी चूत में लेने को कहा.

अरुणिमा बिना बहस किए उसके लंड को चूत में लेकर किसी प्रोफेशनल पोर्न स्टार की तरह उसके लंड पर उछलने लगी.
थोड़ी देर बाद उसने उसे रोका और उसे बिस्तर के किनारे खड़ी होकर झुकने को कहा.

उसके झुकते ही उस फोटोग्राफर ने अपना लंड उसकी गांड में डाल दिया और उसके मम्मों का कचूमर बनाते हुए उसकी गांड मारने लगा.
थोड़े देर तक उसकी गांड मारने के बाद वो भी उसकी गांड में झड़ गया.

दोनों ने अरुणिमा को फ्रेश होकर आने को कहा और ये लोग सुस्ताने लगे.
फिर मुझे कैमरा का फंक्शन बताने लगे, मैंने कारण पूछा तो बोले की दोनों एक साथ अब उसको चोदने वाले हैं. ये कैमरा आटोमेटिक है. फिर भी थोड़ा नजर रखना सही रहेगा.

अरुणिमा वापस आई तो उसको पास बुलाया और उसको अपना लंड सहलाने को कहा.
मेरी बीवी चुपचाप लंड सहलाने लगी और जैसे ही दोनों का लंड टाइट हुआ, दोनों ने उसे खड़ा किया और उसकी चूत और गांड में एक साथ लंड घुसा कर उसकी घमासान और आक्रामक चुदाई करने लगे.

दोनों इतनी आक्रामक चुदाई कर रहे थे कि एक बार तो अरुणिमा की भी गांड फट गई, पर जैसे तैसे उसने खुद को संभाला और प्रोफेशनल रंडी की तरह पोज़ दे दे कर चुदवाती रही.
काफी देर चोदने के बाद दोनों एक साथ उसकी चूत और गांड में झड़ गए और अपने कपड़े पहनने लगे.

उनके तैयार होने के बाद मैंने अरुणिमा से कहा कि मैं दोनों को बाहर छोड़ कर आता हूँ.
अरुणिमा उठी और चुपचाप बाथरूम में चली गई.

मैं बाहर आया और दोनों ने अपने अपने कैमरा के मेमोरी कार्ड निकाल कर मुझे दे दिए और चले गए.
कार्ड लेकर मैं ऑफिस गया और सब डाटा लैपटॉप में डाल दिया.

ऑनलाइन सॉफ्टवेयर्स की मदद से मैंने थोड़ी बहुत एडिटिंग की और कुछ फोटो और वीडियो को मोबाइल में कॉपी कर लिए.

मैंने अपने कांट्रेक्टर दोस्त को कॉल करके बुला लिया.
वो आया तो उसको अपने मोबाइल पर अरुणिमा के फोटो और वीडियो दिखाए.

अरुणिमा के जलवे देख कर वो मंत्रमुग्ध हो गया.
उसने मुझे अरुणिमा को फाइनल करने को बोल दिया.

उसने मुझसे ये जरूर पूछा कि लड़की कौन है?
पर मैंने बात घुमा दी.

अब उसके बाद मुझे ध्यान आया कि अरुणिमा को इन लोगों से घर पर तो चुदवाना ठीक नहीं लगा.
कोई भी घूमते फिरते घर पहुंच सकता था और फिर स्थायी तौर पर अरुणिमा को चोदना चालू कर सकता था.

मैंने फिर से विश्वेश्वर जी को कॉल किया और एक रूम का सस्ता फ्लैट का इंतजाम करवा लिया.

विश्वेश्वर जी बड़े प्यार से बिना सवाल किए सहयोग कर रहे थे.
एक हफ्ते में मैंने उस जगह पर बिस्तर टेबल का इंतजाम कर दिया और पंखा कूलर लगवा दिया.

एक हफ्ते के बाद मेरा दोस्त आया और मुझे बताया कि कुल मिला कर चार लोग उस लड़की (अरुणिमा) की चुदाई करेंगे.
मैंने हामी भर दी और उसे उस फ्लैट का एड्रेस और एक चाभी दे दी.

रविवार का दिन तय हुआ और उसके अफसर लगभग दो बजे दोपहर में पहुंचने वाले थे.

मेरे दोस्त ने मुझे बता दिया तो मैंने अरुणिमा को कॉल किया.
मैंने उससे कहा- एक एड्रेस भेज रहा हूँ तुम्हारे मोबाइल पर, विश्वेश्वर जी के कुछ ख़ास आदमी मिलेंगे वहां, विश्वेश्वर जी ने हिदायत दी है कि उनको अपनी सही पहचान मत देना और घर का पता और मोबाइल नंबर भी मत देना. वो लोग दो बजे तक पहुंचने वाले हैं, तुम ज्यादा लेट मत करना.

अरुणिमा ने कुछ नहीं कहा, बस हां बोल कर कॉल काट दी.

लगभग सात बजे मैं घर पहुंच गया पर अरुणिमा घर से नदारद थी.
मैंने ना उसे कॉल किया ना किसी से खबर ली.

लगभग नौ बजे से आस पास अरुणिमा ऑटो से घर पहुंची.

वो अन्दर आई पर मुझसे कुछ नहीं बोली और सीधा नहाने चली गई.
उसी चाल ढाल बता रही थी कि वो वहां किस कदर चुदी होगी.

मेरे दिल में इस बात से काफी सुकून हो रहा था. मन ही मन सोच रहा था, चुदने का मन है ना छिनाल तेरा, मज़ा आया होगा चुद कर रंडी.
नहा कर अरुणिमा ने खाना खाया और चुपचाप बिस्तर पर आकर सो गई.

अगले दिन एक बजे के आस पास मेरे कांट्रेक्टर दोस्त ने मुझे कॉल करके एक बियर बार में बुलाया.
यूँ तो मैं दिन में पीता नहीं था पर फिर भी मिलने चला गया.

उसने जिद करके एक बियर मंगा ही ली.

उसके बाद उसने मुझे एक पैकेट दिया और कहा- वो चारों उस लड़की से बहुत खुश हुए हैं और इनाम दिया है.
मैंने उसकी तरफ देखा तो उसने कहा- दो लाख है इसमें … उस लड़की की कीमत समझ ले.

मैंने मुस्कुरा कर वो पैकेट जेब में रख लिया.

उसके बाद उसने एक छोटा बैग मुझे दिया और कहा- मेरा लगभग बीस करोड़ फंसा था, जो अब क्लियर हो गया है. मैंने सोचा हुआ था कि जो मेरा पेमेंट क्लियर करवा देगा उसको एक परसेंट दे दूंगा. ये आपके लिए बीस लाख हैं, प्लीज मना मत करना.
मैंने पहले मना किया, पर फिर रख लिया.

निकलते टाइम उसने कहा- बहुत तारीफ सुनी है उस छिनाल की, एक बार मुझे भी मौका दिलवा दो.
मैं वापस टेबल पर बैठ गया और उन्होंने मुझे एक अलग लिफाफा दिया.

मैंने उनसे कहा- चाभी है ना, कल दो बजे पहुंच जाना.
उन्होंने कहा- अभी दो नहीं बजे हैं, अभी का कोई मुहूर्त है क्या?
मैंने कहा- आप पहुंचो.

वो मुस्कुराये और बिल पेमेंट करके निकल गए.

मैंने तुरंत अरुणिमा को कॉल किया और कहा- कल एक आदमी छूट गया था और आज अभी वहां पहुंचने वाला है. लेट मत करना.
अरुणिमा ने सिर्फ हां कहा और फ़ोन काट दिया.

शाम को पांच बजे के आस पास मेरे दोस्त ने मुझे कॉल करके बताया कि उसे बहुत मजा आया.
मैंने उससे कहा- आपके और दोस्त होंगे, उनको भी इस तरह के मदद की आवश्यकता होगी तो उन्हें मेरा सुझाव दे दीजिये.

उन्होंने कहा कि हां वो सबसे बात कर लेंगे और मुझे बता देंगे.

उसके बाद मुझे महीने में आठ से दस बार अरुणिमा को चुदवाने के लिए अफसर या इंजीनियर मिलने लगे.

एक बार में तीन से चार लोग जमा हो जाते थे और हर बार मुझे मेरी वाइफ हॉट सेक्स की कीमत मिलने लगी. इसके अलावा भुगतान पर कमीशन भी मिलने लगा.

अरुणिमा का खुद से बाहर चुदवाना भी जारी होगा, पर अब मुझे इससे ज्यादा फर्क नहीं पड़ता था.
वो मेरे लिए महीने में वो अपनी चूत से काफी कमा रही थी, तो थोड़ा बहुत कहीं मुँह मार लेती होगी, इस बात से मुझे कोई एतराज नहीं था.

इसके अलावा जो अफसर या इंजीनियर का समूह उसको फ्लैट पर चोदता था, वो मुझे कीमत दे ही देते थे तो अपने पैसे की पूरी कीमत वसूलते थे.
वो लोग अरुणिमा की घमासान और आक्रामक चुदाई करते थे और उसके बाहर मुँह मारने के लिए इतनी सजा काफी थी.

अरुणिमा को बस ये पता नहीं था कि मैं उसकी चूत की कीमत भी ले रहा था.
वो तो यही सोच रही थी कि विश्वेश्वर जी के कारण उसकी चुदाई चल रही थी.

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