दोस्तो, कैसे हो आप लोग मेरा नाम कार्तिक हैं मेरी उम्र 23 साल हैं। आज मैं आपको अपनी चुदाई कहानी में बताता हूँ।
बात 1 साल पहले की हैं। लड़कियां पटाना, उनको घुमाना फिराना और उनकी चुदाई करना मुझे बहुत पसंद हैं।
ऐसे ही मेरे पड़ोस की एक लड़की जिसका नाम शिखा था, मुझसे सेट हो गयी।
अब सेटिंग तो थी पर किसिंग के अलावा कुछ करने नहीं देती थी तो मुझे मज़ा नहीं आता था।
कभी कभी तो ऐसी हालत हो जाती थी कि उससे मिलने के बाद मूठ मारकर काम चलाना पड़ जाता था.
इसी बीच एक दिन शिखा ने मुझे अपनी सहेली से मिलवाया क्या माल थी भाई वो! 34-28-32 उसका फिगर रहा होगा उस वक़्त
सोचो ज़रा … कौन ऐसे गदराये माल को चोदना नहीं चाहेगा।
अब जब मैंने उसे देखा तो मेरा लंड सलामी देने लगा. मैं सोचने लगा कि क्या लड़की है बाप! मिल जाये तो मज़ा आ जायेगा।
ये सब सोच ही रहा था कि शिखा बोली- कहाँ खो गए?
मैंने कहा- कुछ नहीं ऐसा लगता है कि कि आपकी सहेली को कहीं देखा है!
शिखा बोली- नहीं नहीं … ये अभी अभी यहाँ आयी है बाहर से!
मैंने कहा- फिर तो आपका स्वागत है हमारे शहर में!
उसने कहा- हेल्लो … मैं ऋतू हूँ।
मैंने कहा- हेल्लो ऋतू और क्या करती हो आप?
तो मेरी गर्लफ्रेंड ने मुझे कहा- ये मेरे साथ अब यहीं पढ़ेगी।
फिर मैंने कहा- चलो अच्छा है, अब तुम मेरी जान नहीं खाओगी अपनी सहेली के साथ ऐश करो।
और हम तीनों हंसने लगे। पर मेरी नज़र उसके फिगर से हट ही नहीं रही थी और शायद यह उसने भी देख लिया कि मैं उसे देख रहा हूँ इस तरह पर उसने कुछ कहा नहीं।
फिर वक़्त बीता … हम तीनों मिलने लगे जहाँ मेरी गर्लफ्रेंड आती, वहाँ उसे भी ले आती।
तो मेरा मेरी गर्लफ्रेंड से कुछ बन नहीं पाता था और इधर मेरा लंड ऋतू की गांड के पीछे लगा रहता था क्योंकि मन ही मन मैं उसे भी चोदने का ख्वाब देखता था।
फिर एक दिन ऋतू मुझे मार्केट में मिली वह अकेली थी.
मैंने उसे देखा तो उससे मिलने चला गया
ऋतू – हाय .. तुम यहाँ कैसे?
मैं – बस तुम्हें देखा तो मिलने चला आया।
ऋतू – सच में?
उसकी आँखों में चमक आ गई और कहा- अच्छा किया यार … मुझे मार्केट से सामान लेना है पर कहाँ कहाँ जाऊं … समझ नहीं आ रहा
मैंने कहा- क्या लेना है, बताओ मुझे चलो मैं चलता हूँ तुम्हारे साथ और फिर वो मान गई फिर हमने उसकी शॉपिंग की और बातें करते चले.
इधर उधर की बातों के बाद फिर मैंने उससे कहा- यार तुम्हें कोई पसंद नहीं आया क्या अभी तक? तुम भी बना लो एक बॉयफ्रेंड!
उसने कहा- नहीं, ये प्यार व्यार मुझे नहीं करना।
तो फिर मैंने पूछा- तुम्हारी सहेली का तो है ना … देखो मैं तुम्हारे सामने खड़ा हूँ जो तुम्हारी सहेली को खुश रखता है और सारा काम भी करता है बाहर का!
तो उसने झट से पूछा- तुम खुश हो क्या उसके साथ? मैं चुप हो गया
उसने फिर कहा- एक बात बोलूं … ने तुम्हें क्या दिया है प्यार अब तक? मैं सुन रहा था बस उसकी बातें।
फिर उसने कहा- देखा, कोई जवाब नहीं है ना. तुम अच्छे हो उसके लिए … पर वो है क्या?
मैंने कहा- हाँ है ना!
तो उसने कहा- उसने सब बताया है मुझे तुम्हारे बारे में! वह तुम्हें अपने पास भी भटकने नहीं देती और कहती है मेरा बॉयफ्रेंड है।
अब मैंने इस मौके का फ़ायदा उठाने का सोचा और उसको अपना दुख बांटने लगा- यार देख ना … सच में वह मुझे अपने आपको टच करने भी नहीं देती. कहती है शादी के बाद सब करना!
ऋतू हंसने लगी, कहने लगी- वो पागल है उसे कुछ नहीं पता!
तो मैंने ऋतू से पूछा- क्या तुम्हें पता है?
उसने कहा- हाँ मैं जानती हूँ कि क्या होता है, कैसे होता है।
मैंने उसकी तारीफ करते हुए कहा- वाह यार … लड़की हो तो तुम्हारे जैसी हो।
वह फिर हंसने लगी और उसकी हंसी से उसके बूब्स हिलने लगे अहा … क्या मस्त बूब्स थे उसके!
फिर ऐसे ही बात करते हुए मैंने उसे घर छोड़ दिया और कहा- कभी भी कुछ काम हो इस दोस्त को याद करना बस तो वह हंसी और कहा- थैंक यू.
फिर उसने कहा- तुम्हारी वो गर्लफ्रेंड है ना … वो जल के मर जाएगी अगर मैंने अब तुमसे हेल्प मांगी तो!
मैंने भी कह दिया- तो देख … उसे मत बताना ना!
उसने मुझे एक टक देखा और कहा- चल अब जा … फिर मिलते हैं।
अब मैं ऋतूको लेकर सोचने लगा, मेरे दिलो दिमाग़ फिर वही घूमने लगी। मैं सोचने लगा कि कैसे इसकी लूं एक बार बस मौका मिले!
और फिर एक दिन मौका मिला वह मुझसे मिलने आयी और कहा- मैं अकेलापन फील कर रही थी तो सोचा तुमसे मिल लूं. क्या तुम फ्री हो? मैंने झट से हाँ कर दी।
फिर हमने बातें करना शुरू कर दी वह अपनी फॅमिली के बारे में बताने लगी। मैं भी सुनता गया और देखता गया बस … उसकी आँखों में खो सा गया
फिर उसने मुझसे कहा- क्या तुम मेरे बेस्ट फ्रेंड बनोगे? मैंने कहा- क्यों नहीं … बिल्कुल!
फिर हम अब पक्के दोस्त बन गये और मिलने लगे.
मेरी गर्लफ्रेंड यानि शिखा के साथ भी मैं अब शिखा ऋतू से मिलने लगा और ऋतू को कभी कोई दिक्क़त नहीं हुयी इस बात से!
जब भी मैं शिखा को प्यार करने की सोचता या छूने की करता तो वो शादी वाला ज्ञान देने लगती ये ऋतू को अच्छा नहीं लगता था.
ऋतू उसे कुछ नहीं कहती थी पर मेरे लिए ऋतू को बुरा लगता था.
एक दिन ऋतू ने मुझें कॉल किया और पूछने लगी- कहां हो?
मैंने कहा- घर पे!
वो बोली- मेरे घर आ जाओ!
मैंने सोचा कि पता नहीं क्या हुआ फिर मैं उसकर घर चला गया वहाँ देखा तो ऋतू घर पे अकेली थी, उसके मम्मी पापा बाहर गए थे
उसने मुझे बैठने को कहा और फिर वह अंदर जाने लगी मैं उसे पीछे से देख कर उसके चूतड़ देखकर गर्म हो गया.
फिर वह मेरे लिए फ्रेंडशिप बैंड लेकर आयी और बोली- हाथ आगे करो!
मैंने कहा- क्यों?
उसने कहा- करो तो!
मैंने हाथ आगे कर दिया.
उसने फिर मुझें फ्रेंडशिप बैंड बांधा और मुझे कहा- तुम मेरे सबसे अच्छे दोस्त हो! आज जो चाहिये, मांग लो. मैं तुम्हें दे दूंगी.
यह सुनते ही मुझे सारी बात समझ में आ गयी। मैंने सोचा कि मौका अच्छा है, मांग लेता हूँ।
और मैंने उससे कहा- मुझे तू चाहिए। वह हंस पड़ी
मैंने कहा- मुझे तू चाहिए. और उसे अपनी बाहों में भर लिया.
वह दो मिनट वैसे ही मुझसे चिपकी रही और बोली- मैं जानती हूँ कि तू मुझे चाहता है शुरु दिन से! फिर उसने मुझे मेरे गाल पे चूम लिया।
फिर क्या था … मैंने भी उसे किस करना शुरू कर दिया वह मेरा पूरा साथ देने लगी और तेज़ सांसें भरने लगी.
अब मुझे और मज़ा आने लगा कि आज तो ये चुद गयी मुझसे! मेरा लंड खुश हो गया और टनटना उठा.
अब मैंने देर ना करते हुए उसे खूब चूमा और उसकी चूचियां दबाने लगा और उसके कपड़े उतारने लगा उसने कहा- रुको, बहुत टाइम है … आराम से कर लेना और मुझे वह अपने बेडरूम में ले गयी.
मैं बेफिक्र होकर उससे लिपट गया और उसको चखने लगा और कहने लगा- तुम कमाल की सोच वाली लड़की हो यार और इतनी खूबसूरत भी।
मैंने उसको बेड पर लिटा लिया और चूमने लगा उसकी चूचियां मेरे हाथों में थे और मैं उन्हें दबाये जा रहा था.
मैं उसके चूचे मसल रहा था ऊपर से ही और वह मज़े ले रही थी
अब वह जोश से भर गयी और उसने अपनी कुर्ती उतार दी.
यह देख मैं और उतावला हो गया और मैंने भी अपनी शर्ट निकाल दी। फिर मैंने उसकी चूत पर हाथ डाल दिया वो पूरी गीली हो गयी थी और वह पूरी तरह गर्म हो चुकी थी।
मैंने ज़रा भी देर ना की और उसकी लेगी उतारने लगा देखा तो उसने चड्डी ही नहीं पहनी थी.
मैंने उसकी लेगी उतारी और कहा- चड्डी कहां है?
उसने कहा- तेरे लिए नहीं पहनी थी।
मैंने कहा- साली तू पहले से तैयार थी उसने मुस्कुरा के अपना सर हिला दिया
मैंने उसकी टांगों को पकड़ा और अपनी ओर खींचा और सीधा उसकी चूत में मुंह डाल कर उसकी चूत चाटने लगा.
वह एकदम उछल पड़ी और ‘ओह्ह आह’ करके आवाजें करने लगी मुझे मज़ा आ रहा था.
ऋतू अपनी जाँघों से मेरा सर अपनी चूत में दबाने लगी मैं भी अपनी जीभ उसकी चूत की दरार में डालने लगा और मुंह से ही उसकी चूत चोदने लगा.
इतने में उसने पानी छोड़ दिया और मैं उसे पी गया फिर मैंने अपनी पैन्ट खोली तो मेरा लंड चड्डी से बाहर झाँकने लगा.
यह देख ऋतू बोली- कितना बड़ा है ये!
मैंने कहा- छूकर देख! वह मेरा लंड पकड़ कर सहलाने लगी.
फिर मैं लंड को उसके मुंह के पास ले गया उसने मेरा लंड सीधा मुंह में ले लिया फिर मैंने उसके मुंह की चुदाई की और लंड गीला कर लिया
फिर मैंने उसके पैर फैला दिये उसके हाथों को उसके पैरों में फंसा दिया अब उसकी चूत पूरी तरह खुल गयी थी उसका छेद साफ नज़र आ रहा था.
मैंने अपना लंड उसके छेद में टिकाया और एक झटके फिर घुसा दिया वो एकदम से चीखी … पर उसने खुद अपने हाथों से अपना मुंह बंद कर दिया.
दर्द से तड़प उठी वो!
मैं रुक गया और उसे किस करने लगा फिर वह शांत हुयी और कहा- आराम से करना.
मैंने फिर धीरे धीरे उसकी चूत की चुदाई करना शुरू किया और फिर क्या था … आह आह की आवाज़ उसके कमरे में गूँज उठी और मेरे लंड ने रफ़्तार पकड़ ली.
10 मिनट तक मैंने उसे पूरी ताकत से चोदा वह झड़ चुकी थी अब मैं झड़ने वाला था तो मैंने कहा- मुंह खोल!
उसने कहा- क्यूं?
मैंने कहा- खोल ना!
उसने मुंह खोला तो मैंने उसका सर पकड़ा और अपना लंड उसके मुंह में डाल दिया और चोदने लगा. वह भी गर्म लंड चूसने लगी.
फिर मैं वहीं झड़ गया और सारा पानी उसके गले में उतार दिया वह सोचती रह गयी कि ये क्या था.
मैं उसकी बगल लेट गया चुदाई के कुछ देर बाद वह उठी, उसने खुद को साफ किया और मैंने भी कपड़े पहने और फिर हम दोनों बाहर आकर बैठ गए।
इतने में उसके घर की बेल बजी मैं डर गया पर उसने कहा- कुछ नहीं होगा और वह गेट खोलने गयी बाहर देखा तो शिखा थी।
वह सहम गई और इससे पहले कि कुछ कह पाती … शिखा बोली- कितना टाइम लगाती है यार गेट खोलने में।
वहाँ उसने मुझे देखा और शॉक हो गयी, बोली- आप यहाँ कैसे? मैंने कहा- बस ऐसे ही आया था काम से पर उसे शक तो हो गया था।
फिर उसने हम दोनों को देखा और समझ गयी कि हम दोनों के बीच कुछ तो हुआ है और बिना कुछ कहे वहाँ से चली गयी।
ऋतू ने मेरी तरफ देखा और कहा- जा उसको समझा अब और वो अंदर चली गयी।
मैं शिखा के पीछे गया और उसे समझाना चाहा पर वह नहीं समझी और बोली- तूने मेरा दिल तोड़ दिया और चली गयी.
वक़्त बीता ऋतू और मेरे बीच सब अच्छा था जब भी मौका मिलता, मैं उसकी फुल चुदाई करता था और कई बार उसकी गांड भी पेल ली थी.
फिर एक दिन आया, शिखा मेरे घर आयी… और बोली- तू मुझसे प्यार करता है?
मैंने कहा- हाँ यार तो तू ऋतू से नहीं मिलेगा अब तुझे जो चाहिए … तू मुझसे लेना इतना बोलकर वह मुझे किस करने लगी.
पहले तो मैं पीछे हटा और कहा- तू ये क्या करना चाहती है? तो उसने कहा- तू मेरा है … बस मेरा और मुझे चूमने लगी.
वहाँ वह अपने आप मेरे सामने आकर मेरे सीने से लग कर रोने लगी मैंने उसके आंसू पौंछे और उसको किस किया फिर मैंने उसे जी भर कर प्यार किया.
तब मैंने उसके कपड़े उतार कर उसको नंगी कर दिया पहली बार मैंने शिखाको ऐसे नंगी देखा था.
फिर मैंने उसको भी ऋतू की तरह मस्त चोदा और शिखा की सील तोड़ी और उसकी गांड तो मैंने दबा के चोदी.
ऋतू को भी कभी कभी छुप छुप कर चोद लेता था
अब मेरे लण्ड को दो चूत मिल गयी थी आपको दोस्तों ये मेरी सेक्स कहानी कैसी लगी कमेंट करके जरूर बताएं