दोस्तों हमे अपनी पिछली कहानी में बताया था की किस तरह से मेरे भाई में मेरी चाची की चुदाई की और मेने उन्हें ये सब करते देख लिया था और भाई को पता चल गया था।
अब आगे की कहानी कुछ इस तरह है…..
अगले दिन सुबह में 7 बजे उठी और सब के लिए नाश्ता तैयार करने लगी, मेरे दिमाग में रात वाली बात जा ही नहीं रही थी और जब भी मेरी नजर भईया पर पड़ती तो में शर्मा कर मुँह फेर लेती थी।
मेने 2-3 बार नोटिस किया तो भईया भी मुझे बार बार देखे जा रहे थे ऐसा लग रहा था जैसे वो मुझे कल के बारे में कुछ बात करने वाले है।
मै सारे लोगो को चाये देने के बाद भाई को ऊपर वाले रूम में उन्हें चाये देने गयी, भईया कमरे में अकेले बैठे हुए थे, मुझे थोड़ा अजीब भी लग रहा था, जैसे ही मे चाये की ट्रे उनके पास लेकर गयी तो उन्होंने ट्रे की जगह मेरा हाथ पकड़ लिया और कहने लगे कल रात के बारे में तुमने किसी को बताया तो नहीं?
मेने कहा – नहीं, भईया आप मेरा हाथ छोड़िये कोई आ जायगा।
इतना सुनते ही वो बेड से उठे और कमरे का दरवाजा बन्द कर दिया और आकर मुझे पीछे से अपनी बाहों में भर लिया, मै घबरा गयी और बोली भईया प्लीज छोड़ दो हमे कोई देख लेगा।
भईया ने कहा – मुझे पता है की कल रात तुम हमे चुदाई करते हुए देख कर मजे ले रही थी और अपने बूब्स को भी दबा रही थी, मुझे पता है की उस समय तुम्हारा भी मन चुदाई करवाने का हो रहा था।
मेने कहा – हां भईया, कल आप दोनों को चुदाई करते हुए देख कर मेरा भी मन चुत चुदवाने का कर रहा था, मै आप का मोटा लण्ड देख कर कल रात यही सोच रही थी की काश चाची की जगह आप मुझे चोदते तो कितना मजा आता।
भईया ने कहा – सच्ची, मै तो तुम्हे कब से चोदने की सोच रहा था, ना जाने मेने कितनी बार तुम्हारे नाम की मुठि मारी होगी।
यह सब बोलते बोलते भईया का लण्ड खड़ा हो गया और मेरी गांड में गड़ने लगा, मुझे मजा तो आ रहा था पर मुझे डर इस बात का था की कही कोई हमे देखा ना ले, फिर मेने पूरी तागत लगाकर भईया की बाहों से छुट कर निचे आ गयी।
मेरी दिल की धडकने अभी भी जोर जोर से धड़क रही थी और यह सोच कर बहोत खुश भी थी की भईया भी मुझे चोदना चाहते है।
इसके बाद में घर के काम करने लगी, अभी भी मेरे दिमाग में भईया का मोटा तगड़ा लण्ड घूम रहा था अब तो उनके लण्ड से चुदने की इच्छा और बढ़ने लगी।
कल बुधवार था, हमारे यह लखनऊ में बुधवार को बाजार लगता है और मम्मी और चाची हर बुधवार को बाजार जाया करते थी, पर इस बार बुआ जी भी थी तो मम्मी बोल रही थी की उन्हें भी साथ लेकर जायँगी।
जब यह बात हम दोनों को पता चली तो हम दोनों बहोत खुश थे की अगर ये तीनो बाजार चली जायँगी और पापा और चाचा काम पर चले जायँगे और भाई बहन स्कूल तो तो हम दोनों रह जायँगे।
रोजाना की तरह अगले दिन हम उठे मेने जल्दी से नाश्ता तैयार करके सबको दिया, पापा और चाचा जी नाश्ता करके काम पर चले गए और छोटे भाई बहन स्कूल चले गए, लगभग 2-3 घंटे बाद मम्मी, चाची और बुआ जी भी बाजार के लिए तैयार होकर जाने लगे और मम्मी ने मुझसे जाते समय बोला की बेटा हम जल्दी ही आ जायँगे गेट अच्छे से बन्द रखना,
मैने बोला – ठीक है मम्मी जी, और बोलकर दरवाजे बन्द कर दिए
यह सब मेरा भाई ऊपर खड़े होकर पहले से ही देख रहा था और मेरे दरवाजा बंद करते ही वो निचे आ गया और मुझे बरामदे में ही पीछे से पकड़ लिया और मेरे चुचो को दबाने लगे साथ ही मेरी गर्दन को चूमने लगे और बोले की प्रिया यार आज तो बहोत अच्छा मौका है आज, जमकर चुदाई करेंगे।
मेने बोला – हा भईया, में भी यही चाहती हु की आज आप मेरी जमकर चुदाई करे मै कब से आपके लंड की प्यासी हु।
भईया ने इतना सुनते ही मेरे दोनों चूचियों को बुरी तरह से मसलना शुरू कर दिया और मेरे कान को अपनी जीभ से चाटने लगे।
मुझे उस समय इतना मजा आ रहा था की मेरे मुँह से मादक सिसकिया निकलने लगी….. आअह्ह्ह्ह… ओह्ह्ह्ह… भईया यहां हमे कोई देख लेगा अंदर चलते है।
भईया ने इतना सुनते ही मुझे अपनी गोद में उठाया और जिस कमरे में चाची को चोदा था उसी कमरे मे ले जाकर मुझे बिस्तर पर लिटा दिया और मेरे ऊपर लेट कर मेरे होठो को चूसने लगे और हाथो से मेरे चूचियों को टीशर्ट के ऊपर से ही दबाने लगे।
तो मे अपने हाथो से उनके सर के बाल सहलाने लगी, वो मेरे होठो को बहोत मजे से चूसे जा रहे थे और कभी कभी काट भी रही थे।
फिर उन्होंने अपना एक हाथ मेरी टीशर्ट के अंदर डालकर मेरी एक चूची को दबाने लगे और तुरंत ही मेरी टीशर्ट ऊपर की तरफ खिसककर निकल दी, अब मेरी 36 की बड़ी बड़ी चूचियाँ लाल रंग की ब्रा में से झाक रही थी।
भईया ने तुरान ही मेरी दोनों चूचियों को अपने दोनों हाथो से पकड़ लिया और उनके बिच में अपना मुँह घुसकर दोनों चूचियों पर फेरने लगे।
मेने अपने दोनों हाथों से उनका सर पकड़ लिया और मजे लेने लगी इतने में ही भईया ने अपने हाथों को पीछे की तरफ ले जाकर मेरी ब्रा के हुक खोल दिए और ब्रा को बिस्तर के निचे फेक दिया।
अब मेरी दोनों चूचियाँ ब्रा से आजाद हो चुकी थी और वो मेरी दोनों चूचियों को पकड़कर जोर जोर से दबाने लगे और मुझे पीछे की ओर बेड पर धकेल दिया फिर उन्होंने अपनी भी टीशर्ट निकाल कर फेक दी और मेरे ऊपर आकर मेरे एक बूब्स की निप्पल को अपनी जीभ से चाटने लगे और दूसरे हाथ से मेरे दूसरे बूब्स को दबाने लगे।
वो मेरे बड़ी बड़ी चूचियों को बरी बरी से चूसने लगे और में भी उनका साथ देते हुए मजे से अपनी चूचियाँ चुसवा रही थी, कुछ देर बाद उन्होंने अपना एक हाथ मेरे लोवर के अंदर डालकर मेरी चुत को पेंटी के ऊपर से ही सहलाने लगे और साथ साथ ही ऊपर से एक चूची को जमकर चूसे जा रहे थे।
कुछ देर बाद वो बेड के किनारे खड़े हुए और मेरे पेरो को पकड़कर मुझे भी बेड के किनारे खिसका लिया फिर एक ही बरी में मेरा लोवर और पेंटी खीच कर निकल दी, अब में उनके सामने बेड पर पूरी नंगी पड़ी थी।
अब उन्होंने मेरे दोनों पेरो को फैला दिया और अपने मुँह को चुत के करीब लाकर जीभ को मेरी चुत की दोनों फाको में डाल दिया और जीभ को जल्दी जल्दी अंदर बहार करने लगे।
भईया मेरी चुत को ऐसे चाट रहे थे जैसे जन्मो के प्यासे हो और में भी अपनी टंगे फैलाकर चुत चुसाई का पूरा मजा ले रही थी और आअह…. हम्म्म… की सिसकियाँ के साथ बोली की भईया कितना मस्त चुत चूसते हो आप मुझे बहोत मजा आ रहा है थोड़ा और अन्दर तक चाटो ना भईया।
ऐसा सुनते ही उन्होंने अपनी पूरी जीभ मेरी चुत में डाल दी और अंदर बहार करके जीभ से ही चुदाई करने लगे और में भी अपनी गांड उठा उठा कर मजे से चुत चुसवा रही थी।
कुछ देर तक इसी तरह से चुत की चुसाई करने के बाद भईया बेड के किनारे खड़े हो गए और फिर मेने उनकी पेंट की ज़िप खोलर जैसे ही निचे किया तो उनका 7 इंच का लण्ड फनफनाते हुए बाहर निकलना उनका तगड़ा मोटा लण्ड देख कर मेरे मुँह में पानी आ गया, में फट से उनके लोडे को अपने मुँह में डालकर चूसने लगी और भईया भी मेरे सर पर हाथ रखकर अपना लोडा मजे से चुसवा रहे थे और बोल रहे थे, प्रिया कितना अच्छा चूस रही हो, बहोत मजा आ रहा है थोड़ा ओर अदंर तक लो प्लीज।
मुझे उनका लण्ड चूसने में बहोत ही मजा आ रहा था पर उनका लण्ड काफी मोटा और बड़ा था तो पूरा मुँह में लेने के बाद भी अंदर नहीं जा रहा था, पर उनकी बात सुनते ही मेने थोड़ी कोसिस की और लण्ड को गले तक ले जाने लगी, भईया को ओर ज्यादा मजा आने लगा, लण्ड को अन्दर तक ले जाने की वजह से मेरे आसु भी निकलने लगे थे, पर भईया को लण्ड चुसवाने में बहोत मजा आ रहा था।
कुछ देर बाद भईया ने मुझे ऊपर उठाया और कहने लगी की अब रहा नहीं जा रहा मुझसे, मेरा चुदाई करने का मन हो रहा है,
मेने बोला – हा भईया, मुझसे भी अब रहा नहीं जा रहा, मुझे जल्दी से चोदो दो ना।
इतना कहकर में बेड पर टांगे फैलाकर लेट गयी और भईया ने अपने लोड़े को थोड़ा सा सहलाया और फिर मरी चुत पर सेट कर दिया और एक जोर दार ध्क्का देकर पूरा 7 इंच लोढा एक ही बारी में अन्दर घुसेड़ दिया, मेने लोडे को चाट कर पहले से ही चिकना कर दिया था वो एक ही बार में अन्दर चला गया पर मेरी चीख निकल गयी थी।
भईया ने फिर धिरे धिरे अपने लोडे थोड़ा सा बहार निकला और मेरे दोनों हाथो को पकड़ कर धिरे धिरे अंदर सरकने लगे मुझे बहोत दर्द हो रहा था, पर भईया नहीं माने उन्होंने अपने धक्को की स्पीड बड़ा दी और अब अपने लण्ड को जल्दी जल्दी अन्दर बाहर करके मुझे चोदने लगे।
अब उनका मोटा तगड़ा लंड ताबड़ तोड़ चुदाई कर रहा था और मै भी मजे से अपनी गांड को ऊपर उठा उठा कर चुदवा रही थी।
मेरी मादक सिसकियों की आवाज पुरे कमरे में गूंज रही थी आआह्ह… हम्म्म… चोदो भईया और जोर से आआह्ह… यस… आहहह…।
थोड़ी देर ऐसे ही चुदाई करने के बाद भईया ने मेरी चुत से लण्ड निकला और मुझे घोड़ी बनने के लिए कहाँ, मुझे चुदने की इतनी जल्दी थी की में तुरंत पलटकर बेड पर घोड़ी बन गयी और चुदने के लिए अपनी गांड को ऊपर उठाने लगी।
भईया ने पीछे से मेरी पीठ पकड़ी और लण्ड को चुत के अन्दर सरकाना शुरू किया और जैसे ही लण्ड पूरा अंदर गया धिरे धिरे लण्ड को बाहर निकालना और फिर एक जोर से झटके के साथ लण्ड को चुत की गहराइयों में उतार दिया, मुझे इतना मजा आ रहा था की में आपको शब्दो में बया नहीं कर सकती बस मन कर रहा था की भईया दिन रात ऐसे ही मेरी चुदाई करते रहे।
भईया 20 मिनट तक इसी पोजीशन में लगातार चुदाई करते रहे और कुछ देर बाद हम दोनों एक साथ झाड़ गए, और उन्होंने अपना लण्ड का सारा पानी मेरे चूतड़ों पर गिरा दिया, हम दोनों 10 मिनट तक एक दूसरे से चिप्पकार लेट गए और इसके बाद दोनों ने कपड़े पहने, भईया ऊपर कमरे में चले गए और में निचे रसोई में खाने बनाने की तैयारी करने लगी, अब हम दोनों मौका मिलते ही चुदाई का प्रोग्राम बना लिया करते थे।
तो दोस्तों ये थी मेरी और मेरे बुआ जी के लड़के के साथ सेक्स की सच्ची कहानी, आपको ये कहानी किसी लगी हमे कमेंट बॉक्स में जररु बताये।