दोस्तो, मैं राज हूँ.
ये मेरी पहली सेक्स कहानी है, तो गलती होना लाजिमी है. प्लीज नजरअंदाज करते हुए माफ़ कीजिएगा.
पाठिकाओं के कौतूहल हेतु लिखना चाहता हूँ कि मेरे लंड का साइज़ सामान्य भारतीयों की तरह ही है, पर इसकी देर तक चलने की खासियत है, जिस वजह से लड़कियों और भाभियों के द्वारा मुझे बिस्तर में बेहद पसंद किया जाता है.
अपनी इसी गुणवत्ता के चलते मैंने बहुत सारी भाभियों और लड़कियों को खूब चोद कर खुश किया है.
आप सभी के लंडों से निवेदन है कि वे खड़े हो जाएं और अपनी अपनी चुत में घुस जाएं या चुत न हो तो हाथ से हिलाएं.
लड़कियों और भाभियों की प्यासी चूतों से प्यास लंड के लिए गर्म होने की इल्तिजा है.
ये फ्री सेक्स स्टोरी आज से 3 साल पहले की उस समय की है, जब मैं जॉब लगवाने का काम करता था.
अपने उसी काम के दौरान मुझे अपनी इस कहानी की नायिका मिली.
उस समय मैं दिल्ली में ही जॉब कर रहा था, साथ ही कम्पनीज में जॉब के लिए प्लेसमेंट भी करवाता था.
इसके एवज में मुझे कम्पनीज से कमीशन मिलता था और कैंडीडेट से भी एक महीने की सैलरी मिलती थी.
एक दिन किसी अनजान नंबर से कॉल आया कि मुझे जॉब की तलाश है.
मैंने उसे अपना रिज्यूमे और एक फोटो भेजने को कहा.
जब उसने अपना फोटो भेजा, तो कसम से लंड फनफना उठा … क्या माल थी यार.
मेरा लंड तो उसकी फोटो देखते ही खड़ा हो गया था.
मैंने उसे दूसरे दिन आने को कहा.
उसका नाम रजिया था (बदला हुआ नाम).
रजिया एकदम दूध जैसी गोरी लौंडिया थी.
उसके बूब्स 34 के, कमर 28 की और उसकी गांड 36 की थी … या यूँ कहूँ कि ऐसा लगा कोई परी उतर कर आ गई हो.
सामने से उसे कोई भी देखेगा तो उसका लंड हर हालत में तुनकी मारेगा, यह गारंटी थी.
मतलब उसके दूध और गांड के उभार देख कर तो किसी बूढ़े का भी लंड खड़ा हो जाएगा.
वह आई और मैंने उसका इंटरव्यू करवाया, पर उसका सिलेक्शन कुछ कारणों से नहीं हो पाया.
दरअसल उस कंपनी के बॉस को लड़की पसंद आ गई थी और वह उसे जॉब देने के पहले उससे ब्लो जॉब करवाना चाहता था, उसे चोदना चाहता था.
यह कंपनी एक फ्लैट बेचने का काम करने वाली कंपनी थी तो कस्टमर को पटाने के लिए उसके साथ लेटने का काम भी करना पड़ता था.
लड़की अनेक मर्दों से चुदने के लिए राजी नहीं थी.
मैंने उससे कहा कि कोई बात नहीं मैं किसी दूसरी कंपनी में बात करूंगा.
वह मुझसे बोली- मैं ऐसा काम नहीं कर सकती हूँ, जिधर मैं एक कॉल गर्ल बन कर रह जाऊं!
मैंने कहा- चलो किसी दूसरी कंपनी में देखता हूँ.
वह हूँ करके चली गई.
उस दिन के बाद मेरी उससे रोज़ाना बात होने लगी.
अब उससे मेरी गाहे बगाहे मुलाकात होना शुरू हो गई.
कुछ समय बाद उससे मेरी काफी सारी बातें होने लगीं.
एक दिन उसने बताया कि वह नई जगह शिफ्ट हुई है, तो उसे घर का कुछ सामान लाना है.
मैंने उसकी मदद की.
उस दिन से वह मुझसे कुछ ज़्यादा ही क्लोज़ हो गई.
फिर धीरे-धीरे हमारी बातें दोस्ती से प्यार की होने लगीं.
एक दिन मैंने उसकी जॉब एक अच्छी कंपनी में लगवा दी, उधर उसके साथ कुछ भी गड़बड़ होने की आशंका नहीं थी.
वह बहुत खुश थी.
मैंने उससे पार्टी मांगी.
उसने संडे को मिलने को बोल दिया.
मैंने कहा- संडे को ही क्यों?
वह मुस्कुरा कर बोली- जरा खुल कर मिल लेंगे!
मैं खुल कर मिल लेंगे का अर्थ समझ गया.
मैंने उससे कहा- रजिया मैं तुमसे प्यार करता हूँ और तुमसे अपना प्यार जताना चाहता हूँ.
वह हंस कर बोली- हां, मैं भी अपना प्यार जताना चाहती हूँ.
मैंने उसका हाथ दबाया तो उसने आंख दबा दी.
मैं समझ गया कि ये लड़की मुझसे चुदने के लिए राजी है.
मैंने पहले ही सारी तैयारी कर ली थी, क्योंकि आग दोनों तरफ़ बराबर लगी हुई थी.
लौड़े की सफाई कर ली थी और बियर की कैन्स ले ली थीं.
तय समय पर हम दोनों मिले.
मैंने एक रिसॉर्ट में रूम बुक कर लिया था.
रूम में आते ही वह मेरे सीने से लग गई.
साला लंड तो ऐसे कड़क हो गया था कि अभी पैंट फाड़ कर बाहर निकल जाएगा.
हमारे होंठ कब एक-दूसरे से जुड़े, पता ही नहीं चला.
कम से कम 20 मिनट तक हम एक-दूसरे की जीभ से खेलते रहे और होंठों को पीते रहे.
क्या होंठ थे उसके एकदम रूई जैसे मुलायम …
फिर मैंने उसके चूचों को धीरे-धीरे दबाना शुरू किया तो वह जोर-जोर से सिसकारियां लेने लगी.
मैंने जल्दी से उसकी टी-शर्ट उतारी और उसकी ब्रा को भी अलग कर दिया.
सच में बड़े ही मस्त बूब्स थे यार … कसम से देख कर ही ऐसा लगा कि बस इन्हें खाता ही रहूँ.
उसके बूब्स पर उसके गुलाबी निप्पलों की झलक तो ऐसी थी कि कसम से मजा ही आ गया.
मैंने एक निप्पल को अपने होंठों के बीच में दबाया और चूसना शुरू कर दिया.
वह मस्त हो रही थी और मादक आवाज निकालती हुई मुझे अपने हाथ से अपने दूध चुसवा रही थी.
मैंने उसके दोनों निप्पल बारी बारी से खूब देर देर तक चूसे और खींचे.
उसकी चूचियां कुछ ही देर में एकदम लाल हो गई थीं क्योंकि मैं एक दूध को चूस रहा था और दूसरे को अपनी मुट्ठी में भर कर मसल रहा था.
फिर दूध से मन भर लेने के बाद मैं नीचे को हुआ और उसके पेट पर किस करना शुरू कर दिया.
वह बिन पानी की मछली के जैसे मचल रही थी.
अब मुझसे भी कंट्रोल नहीं हो रहा था.
मैंने भी जल्दी-जल्दी अपने कपड़े उतारे और उसकी पैंटी को उतार दिया.
आह मस्त चूत थी यार … कसम से एकदम कचौड़ी सी फूली और झांट रहित एकदम सफाचट चिकनी चमेली सी चुत … देख कर ही पता चल रहा था कि इसने लंड लेने के चक्कर में आज आने से पहले ही साफ़ की है.
चुत का रंग भी एकदम गुलाबी, जरा भी कालापन नहीं … यह इस बात का प्रमाण था कि चुत में लंड का आना जाना या तो हुआ ही नहीं है या अभी कम चली है.
फिर जैसे ही मैंने अपने होंठ उसकी चूत पर रखे, उसके मुँह से सिसकने की आवाज़ आने लगी.
मैंने भी जीभ अन्दर डाल दी और जीभ से चुत की दीवारों का रस चाटने लगा.
साथ ही मेरे होंठ उसकी चूत के दाने को पकड़ कर खींचने और रगड़ने में लग गए.
उसका बुरा हाल हो गया था और वह ऊँह ऊँह करती हुई मेरे सर को अपनी चुत पर दबाने लगी थी.
वह लगातार मादक आवाजें निकालती हुई तड़पने लगी ‘आह राज ये तुमने क्या कर दिया और तेज चूस लो आह राज ऐसे ही बस ऐसे ही करते रहो आह बहुत मजा आ रहा है!’
उसकी चूत लगातार पानी छोड़ रही थी, जिसे मैं पीता जा रहा था.
उसने झड़ते समय मुझे कस कर अपनी चूत में दबा लिया था … क्या खट्टा पानी था उसकी चुत का.
थोड़ी देर में वह पूरी तरह से झड़ गई और मैं उसका सारा पानी पी गया.
बड़ा ही टेस्टी पानी था उसकी चुत का.
मैं फिर से उसके होंठों को पीने लगा.
मन तो कर रहा था कि बस ऐसे ही इसके होंठों को खाता रहूँ, कभी न छोड़ूँ इसके होंठों को … मेरा लंड भी उसकी चूत से रगड़ खा रहा था.
वह खुद कमर हिलाकर लंड अपनी चूत में लेने की कोशिश करने लगी और बोलने लगी- बस अब बर्दाश्त नहीं होता जल्दी से चोद डालो.
मैंने उसे और तड़पाना ठीक नहीं समझा.
चुत में लंड पेलने से पहले मैंने उससे अपना लंड मुँह में लेने को कहा, तो उसने मना कर दिया.
मैंने भी कोई ज़बरदस्ती नहीं की और लंड उसकी चूत के ऊपर रख दिया और घिसने लगा.
उसके मुँह से भी ‘आह … आह …’ की आवाज़ आने लगी.
‘राज अब डाल दो अपना लंड अन्दर और मेरी प्यास बुझा दो!’
मैंने एक झटका मारा और मेरा पूरा लंड चूत को चीरता हुआ अन्दर तक घुस गया.
वह सील पैक माल थी तो चुत फट गई थी.
उसकी आंखों से आंसू आने लगे और उसे दर्द होने लगा.
मैंने थोड़ा सा लंड निकाल कर देखा तो थोड़ा सा खून भी निकला हुआ था.
थोड़ी देर में जब उसे थोड़ा आराम मिला, तो वह खुद ही कमर उठाने लगी और कहने लगी- और तेज करो राज … और तेज … और बना लो मुझे अपना!
मैं तेज-तेज चुदाई करने लगा.
कुछ देर बाद मैंने लंड चुत से खींचा और उससे उल्टा कर दिया.
वह समझ गई और घोड़ी बन गई.
जैसे ही वह घोड़ी बनी, मैंने पीछे से लंड छेद में पेल डाला.
लंड एक ही झटके में अन्दर सरक गया रहा तो वह एकदम से चीखी- हाय अम्मी मर गई!
मैं उसके दोनों दूध पकड़ कर चोदने लगा और वह भी दर्द भूल कर लंड का मजा लेने लगी.
मैंने उसे करीब 15 मिनट तक चोदा. इतने में वह 2 बार पानी छोड़ चुकी थी.
अब मेरा भी निकलने वाला था, तो मैंने पूछा- कहां निकालूँ?
वह बोली- अन्दर ही निकाल दो, अभी सेफ डेज हैं.
मैं और तेज तेज शॉट मारने लगा और उसकी चूत के अन्दर ही पानी निकाल दिया.
फिर मैंने उससे बाथरूम में चलने को कहा.
वह उठी तो चल ही नहीं पा रही थी, उसकी आह निकल गई.
मैंने मुड़ कर उसे देखा तो उससे चला भी नहीं जा रहा था.
तो मैंने उसे गोद में उठाया और बाथरूम में ले गया.
उधर उसने खुद को साफ़ किया.
मैंने देखा तो वहां बाथटब भी था.
मैंने बाथटब को पानी से भरा, उसे उठा कर बाथटब में लिटाया और खुद भी उसके साथ आ गया.
हम दोनों में फिर से मस्ती शुरू हो गई.
मैं उसके बूब्स से खेलने लगा और उसे गोद में बिठा कर प्यार करने लगा.
वह अपनी गांड मेरे लंड पर घिसने लगी.
तो मैंने उसके दूध पकड़ कर लौड़े को चुत की दरार पर सैट किया और पीछे से ही उसकी चूत में लंड डाल दिया.
वह आह आह करने लगी.
हम दोनों की मस्त चुदाई शुरू हो गई.
इस बार वह भी बहुत मजे से चूत चुदवा रही थी.
कुछ ही देर में वह खुद ही मेरे लंड पर कूदने लगी.
पानी से छप-छप की आवाज़ और उसके मुँह से ‘आह … आह …’ की आवाज़ निकल रही थी.
ऐसा लग रहा था, जैसे किसी ने कोई सुरीला म्यूजिक लगा दिया हो.
उस पूरी रात को मैंने उसे 4 बार चोदा.
सुबह उससे ठीक से चला भी नहीं जा रहा था.
फिर मैं दर्द निवारक दवा लेकर आया और उसे पानी के साथ पिला दी.
कुछ देर आराम करने के बाद उसे चैन पड़ गया और हम दोनों कमरे से निकल कर अपने अपने घर चले गए.
आज भी जब मुझे उसके साथ बिताई वह रात याद आती है, तो लंड खड़ा हो जाता है.
उसके बाद भी हम कई बार मिले लेकिन उसने मेरे लंड को कभी नहीं चूसा.
कुछ दिन के बाद उसने अपनी एक सहेली की चूत दिलवाई और एक चचेरी बहन को चुदवाया.
वह सेक्स कहानी फिर कभी लिखूँगा.
तब तक के लिए लड़के अपने लंड हिलाएं और लड़कियां अपनी चूत में उंगली करती रहें.