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मिल्फ आंटी ने अपने बूब्स से लंड मसाज किया

गर्मी की उन दिनों में दिल्ली का मौसम बहुत तेज था। मैं राहुल, २२ साल का जवान लड़का, अपनी पढ़ाई के लिए दिल्ली में रहता था। मेरे किराए के मकान के ठीक बगल में रहती थीं श्वेता आंटी। वो एक परफेक्ट मिल्फ थीं – उम्र करीब ४२ साल, लेकिन बॉडी ऐसी कि कोई भी जवान लड़का देखकर पागल हो जाए। उनकी बड़ी-बड़ी गोल-गोल ब्रेस्ट, पतली कमर, और मोटी-मोटी जांघें हमेशा साड़ी या टाइट टॉप में फिट रहती थीं। उनके पति ज्यादातर बिजनेस के सिलसिले में बाहर रहते थे, और उनकी बेटी कॉलेज में पढ़ती हुई हॉस्टल में थी।

श्वेता आंटी बहुत खुशमिजाज थीं। वो मुझे हमेशा “बेटा” कहकर बुलाती थीं, लेकिन उनकी नजरों में एक खास चमक होती थी जब वो मेरी तरफ देखतीं। मैं भी उन्हें चुपके-चुपके देखता रहता था। उनकी क्लीवेज देखकर मेरा लंड अक्सर खड़ा हो जाता था। एक दिन शाम को बिजली चली गई। मैं बालकनी में खड़ा था, तभी आंटी की बालकनी से आवाज आई।

“राहुल बेटा, तुम्हारे पास कोई टॉर्च है क्या? अंधेरा हो गया है।”

मैं तुरंत अपनी टॉर्च लेकर उनकी तरफ गया। दरवाजा खुला था। आंटी ने एक हल्की सी नाइट सूट पहना हुआ था – सफेद कलर का, जो उनके गोरे शरीर पर चिपका हुआ था। उनके बड़े बूब्स सूट के अंदर से साफ झांक रहे थे। मैंने टॉर्च थमाई, लेकिन नजरें उनकी छातियों पर अटक गईं।

“क्या देख रहे हो बेटा?” आंटी ने मुस्कुराते हुए पूछा। उनकी आवाज में शरारत थी।

“कुछ नहीं आंटी…” मैं शर्म से लाल हो गया।

आंटी ने मेरे कंधे पर हाथ रखा। “अरे, शर्मा मत। मैं जानती हूं जवान लड़के क्या देखते हैं। आओ अंदर, चाय बनाती हूं।”

उस रात हम दोनों बालकनी में बैठकर बातें करते रहे। आंटी ने बताया कि उनके पति कितने बिजी रहते हैं, और वो अकेली कैसे फील करती हैं। मैंने भी अपनी लाइफ के बारे में बताया। धीरे-धीरे बातें पर्सनल होती गईं। आंटी ने मेरे हाथ को अपने हाथ में लिया और बोलीं, “राहुल, तुम बहुत अच्छे लड़के हो। मुझे तुम्हारी कंपनी अच्छी लगती है।”

उसके बाद से हम रोज मिलने लगे। कभी वो मुझे खाना खिलातीं, कभी हम साथ में मूवी देखते। एक शाम वो मेरे कमरे में आईं। उन्होंने एक लाल कलर की साड़ी पहनी हुई थी, ब्लाउज काफी डीप नेक वाला। उनके बूब्स का आधा हिस्सा बाहर झांक रहा था। मैं सोफे पर बैठा था, वो मेरे पास आकर बैठ गईं। उनकी जांघ मेरी जांघ से छू रही थी।

“राहुल, तुम्हें मेरी बॉडी अच्छी लगती है ना?” उन्होंने सीधे पूछ लिया।

मेरा मुंह सूख गया। “आंटी… वो…”

“बोलो ना। मुझे बताओ।” उनकी उंगलियां मेरी जांघ पर घूमने लगीं।

“हां आंटी, आप बहुत हॉट हो। आपके बूब्स… बहुत सुंदर हैं।” मैंने हिम्मत करके कह दिया।

आंटी मुस्कुराईं। उन्होंने मेरे हाथ को उठाकर अपनी छाती पर रख दिया। “छूकर देखो। ये तुम्हारे लिए हैं आज।”

मेरा दिल जोरों से धड़कने लगा। मैंने धीरे से उनके बूब्स को दबाया। नरम, गर्म और भारी। आंटी की सांसें तेज हो गईं। “अह्ह… प्यार से दबाओ बेटा। मुझे अच्छा लग रहा है।”

मैंने उनका ब्लाउज खोलना शुरू किया। उन्होंने खुद मदद की। उनके बड़े-बड़े गोरे बूब्स ब्रा से बाहर निकल आए। ब्रा का साइज ३६डी था। मैंने ब्रा भी उतार दी। उनके गुलाबी निप्पल्स सख्त हो चुके थे। मैंने एक निप्पल मुंह में ले लिया और चूसने लगा। आंटी मेरे बालों में हाथ फेरती हुईं कराह रही थीं – “उम्म्म… राहुल… और जोर से… हां ऐसे…”

उनकी एक हाथ मेरी पैंट पर गई। मेरा लंड पहले से ही फुल हार्ड था। उन्होंने पैंट का बटन खोला और लंड बाहर निकाल लिया। “वाह… कितना मोटा और लंबा है तुम्हारा।” उन्होंने धीरे-धीरे हाथ से रगड़ना शुरू किया।

मैं उनके दोनों बूब्स को दोनों हाथों से मसल रहा था। आंटी ने मुझे उठाकर बेड पर लिटाया। फिर वो मेरे ऊपर आईं। उनकी साड़ी कमर तक उठा दी उन्होंने। उनके गीले पैंटी से उनकी चूत की महक आ रही थी। लेकिन आज वो कुछ और करना चाहती थीं।

आंटी ने मेरे लंड को अपने हाथ में पकड़ा और अपने बूब्स के बीच रख दिया। “आज मैं तुम्हें अपना स्पेशल मसाज दूंगी।”

उन्होंने अपने दोनों बड़े बूब्स को दोनों हाथों से दबाकर मेरे लंड को उनके बीच ले लिया। नरम, गर्म, और क्रीमी बूब्स मेरे लंड को चारों तरफ से घेर चुके थे। आंटी ऊपर-नीचे हिलने लगीं। उनका मसाज अनोखा था। हर बार जब वो नीचे आतीं, मेरा लंड उनके बूब्स की गहराई में चला जाता, और ऊपर उठतीं तो लंड का टॉप उनके गले तक पहुंच जाता।

“कैसा लग रहा है बेटा?” आंटी ने पूछा, उनकी आंखों में कामुकता थी।

“बहुत अच्छा आंटी… आपकी ये बड़ी-बड़ी छातियां… उफ्फ… स्वर्ग जैसा फील हो रहा है।” मैं कराह उठा।

आंटी ने स्पीड बढ़ा दी। उनके बूब्स मेरे लंड पर फिसल रहे थे। कभी-कभी वो रुककर लंड के टॉप को चूम लेतीं। उनका मुंह गीला था, लार मेरे लंड पर गिर रही थी, जिससे मसाज और भी स्मूद हो गया। मैं उनके निप्पल्स को उंगलियों से दबा रहा था। आंटी की सांसें भारी हो चुकी थीं। “मुझे भी बहुत मज़ा आ रहा है… तुम्हारा लंड मेरे बूब्स के बीच कितना गर्म है…”

मैंने उन्हें पकड़कर और पास खींच लिया। अब वो मेरे लंड पर पूरी ताकत से मूवमेंट कर रही थीं। उनके बूब्स लंड को मसल रहे थे, दबा रहे थे, और चिपकाए हुए थे। मैं महसूस कर रहा था कि मेरा लंड उनके बूब्स की नरमाई में घुल रहा है। थोड़ी देर बाद आंटी ने अपना पैंटी उतार दिया। उनकी चूत पूरी तरह गीली थी। उन्होंने मेरे लंड को अपने बूब्स से मसाज करते हुए अपनी चूत पर रगड़ना शुरू किया।

“आंटी… मैं जल्दी झड़ने वाला हूं…” मैंने कहा।

“झड़ जाओ बेटा… मेरे बूब्स पर ही झड़ दो।” उन्होंने कहा और स्पीड बढ़ा दी।

मेरा लंड उनके बूब्स के बीच फंसकर पंप हो रहा था। आखिरकार मैं जोर से कराहा और मोटी-मोटी गर्म वीर्य की धार उनके गले, चेहरे और बूब्स पर गिरने लगी। आंटी ने मुंह खोलकर कुछ स्वाद लिया और मुस्कुराईं। “कितना ज्यादा है तुम्हारा… अच्छा लगा?”

मैं हांफ रहा था। आंटी ने मेरे लंड को साफ किया और अपने बूब्स को मेरे मुंह के पास किया। मैंने अपनी वीर्य चाट-चाटकर उनके बूब्स साफ किए। फिर वो मेरे बगल में लेट गईं। हम दोनों एक-दूसरे को चूम रहे थे। उनकी जीभ मेरी जीभ से खेल रही थी।

“राहुल, मुझे तुम्हारा साथ बहुत अच्छा लगता है। तुम मुझे जवान महसूस कराते हो।” उन्होंने मेरे कान में कहा।

उसके बाद हम अक्सर मिलते। कभी-कभी वो मुझे अपने घर बुलातीं। एक दिन उन्होंने मुझे सरप्राइज दिया। उन्होंने ब्लैक लेस ब्रा पहनी हुई थी, जो उनके बूब्स को और भी आकर्षक बना रही थी। हम बेडरूम में थे। आंटी ने मुझे नंगा किया और खुद भी नंगी हो गईं। उनकी चूत साफ शेव थी, गुलाबी और गीली।

मैं उनके पैरों के बीच घुटनों पर बैठ गया और उनकी चूत चाटने लगा। आंटी मेरे सिर को दबाए हुए थीं – “हां बेटा… जीभ अंदर डालो… चूसो मेरी क्लिट… अह्हह…”

उनकी चूत से मीठा रस निकल रहा था। मैं पूरी लगन से चाट रहा था। आंटी का शरीर तड़प रहा था। फिर उन्होंने मुझे ऊपर खींचा। “अब फिर से वही मसाज दो बेटा।”

इस बार वो ऑयल लेकर आईं। उन्होंने अपने बूब्स और मेरे लंड पर ऑयल लगाया। अब मसाज और भी स्लिपरी और सेक्सी हो गया। उनके चिकने बूब्स मेरे लंड पर फिसल रहे थे। वो कभी तेज, कभी धीरे मूवमेंट कर रही थीं। उनके निप्पल्स मेरे लंड के टॉप को छू रहे थे। मैंने उनके बाल पकड़कर उनका मुंह अपने लंड के पास किया। आंटी ने मुंह खोलकर लंड का टॉप चूस लिया, जबकि बूब्स अभी भी लंड को मसल रहे थे।

“उम्म्म… स्वादिष्ट है तुम्हारा लंड…” उन्होंने कहा।

मैं उनके मुंह और बूब्स दोनों का आनंद ले रहा था। आंटी पूरी तरह मेरी हो चुकी थीं। वो खुद को मेरे लंड पर रगड़ रही थीं। फिर मैंने उन्हें चारों खाने चित्त लिटाया और उनके बूब्स के बीच लंड डालकर फक करने लगा। वो अपने बूब्स को और दबाकर मेरी मदद कर रही थीं।

“जोर से करो राहुल… मुझे पसंद है… हां… और जोर से…”

हम दोनों पसीने से तर थे। कमरे में सिर्फ हमारी कराहटें और चमड़ी की चप-चप की आवाजें गूंज रही थीं। आंटी की आंखें बंद थीं, मुंह खुला था, और वो आनंद ले रही थीं। मैंने आखिरकार उनके मुंह में झड़ दिया। आंटी ने सारा वीर्य निगल लिया।

उसके बाद हम अक्सर ऐसे ही इंटीमेट होते। कभी किचन में, कभी शावर के नीचे। आंटी मुझे हर तरीके से खुश रखतीं। उनके बूब्स मेरे लंड के लिए हमेशा तैयार रहते। वो कहतीं, “ये मेरे बूब्स अब तुम्हारे हैं बेटा। जब चाहो, मसाज कर लो।”

एक रात हम दोनों नंगे लेटे थे। आंटी मेरी छाती पर सिर रखे हुए थीं। “राहुल, तुम्हारे साथ मुझे बहुत अच्छा लगता है। तुम मुझे कभी मजबूर नहीं करते, बल्कि मैं खुद तुम्हारे पास आना चाहती हूं।”

मैंने उन्हें चूम लिया। “आंटी, आप भी मुझे बहुत प्यारी लगती हो।”

हमारी ये कहानी ऐसे ही चलती रही। मिल्फ आंटी और मेरा ये हॉट अफेयर दिल्ली की गर्म रातों को और भी गर्म बनाए रखता। उनके बूब्स का वो सॉफ्ट मसाज, उनकी गीली चूत, और हमारी गहरी कामुकता – सब कुछ परफेक्ट था।

 

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